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FIR और NCR में क्या फर्क है? जानिए कैसे होती है कार्रवाई, प्रवेश वर्मा के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट

दिल्ली के तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान एक युवक को थप्पड़ मारने पर PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ पुलिस ने नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है. इसके बाद चर्चा ये है कि FIR और NCR में क्या फर्क होता है.

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FIR और NCR में क्या फर्क है? (Photo: PTI/AI)

दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश वर्मा को एक शख्स को थप्पड़ मारना महंगा पड़ गया. तिलक नगर में सड़क निरीक्षण के दौरान वीडियो बना रहे एक युवक को देखकर प्रवेश वर्मा अपना आपा खो बैठे और उन्होंने उसपर हाथ उठा दिया. ये घटना उस समय हुई जब मौके पर मौजूद आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक जरनैल सिंह ने सड़क की नई सतह की क्वालिटी पर सवाल उठाते हुए उसे हाथ से उखाड़ दिया और दूसरा युवक इस घटना को रिकॉर्ड कर रहा था. इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर सोमवार को दिल्ली पुलिस ने PWD मंत्री के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 के तहत नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) दर्ज की है. जबकि PWD की शिकायत पर जरनैल सिंह के खिलाफ FIR दर्ज हुई है. इसके बाद FIR और NCR के बारे में चर्चा हो रही है. लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि दोनों के बीच आखिर क्या फर्क है, तो चलिए हम इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

ये भी पढ़ें: दिल्ली में PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने युवक को जड़ा थप्पड़, वीडियो वायरल, केजरीवाल बोले-गिरफ्तार करें

FIR और NCR में क्या फर्क?

जब भी कोई व्यक्ति शिकायत दर्ज कराने जाता है, तो पुलिस पूरी जानकारी के बाद ही ये तय करती है कि वो NCR दर्ज करेगी या FIR. सबसे पहले बात करते हैं FIR यानी फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट की. ये तब दर्ज की जाती है, जब कोई बड़ा अपराध होता है. FIR उस जुर्म की पहली आधिकारिक जानकारी मानी जाती है. हत्या, किडनैपिंग, डकैती, यौन उत्पीड़न या पोक्सो एक्ट जैसे बड़े और खौफनाक मामलों में सीधे FIR लिखी जाती है.

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NCR किन मामलों में दर्ज होती है?

वहीं, NCR तब दर्ज की जाती है, जब अपराध उतना गंभीर नहीं होता. ऐसे मामले में जांच शुरू करने के लिए पुलिस को मजिस्ट्रेट की इजाजत लेनी होती है. NCR छोटे-मोटे मामलों के वक्त दर्ज की जाती है. जैसे कि मोबाइल फोन, वॉलेट या कोई जरूरी डॉक्यूमेंट गायब है, लेकिन आपको ये नहीं पता कि वो चोरी हुआ है या गुम. ऐसे मामलों में NCR फाइल होती है. इसके अलावा अगर पड़ोसियों से या रास्ते में किसी से कहासुनी हो जाए, लेकिन किसी तरह की मारपीट या गाली गलौज ना हुआ हो, तो भी NCR ही दर्ज की जाती है.

क्या है सबसे बड़ा अंतर?

FIR और NCR दर्ज होने पर पुलिस के पास अलग-अलग अधिकार होते हैं. अगर FIR दर्ज की जाती है तो पुलिस ऑफिसर बिना किसी वॉरंट के आरोपी को हिरासत में ले सकते हैं. वहीं, NCR दर्ज होने पर ऐसा नहीं किया जा सकता. आरोपी को पकड़ने या पूछताछ के लिए पुलिस को सबसे पहले कोर्ट से इजाजत लेनी पड़ती है. ऐसे मामलों में पुलिस खुद से तफ्तीश शुरू नहीं करती. अगर पीड़ित कार्रवाई करवाना चाहता है तो उसे मजिस्ट्रेट की कोर्ट में अर्जी देनी पड़ती है. जब मजिस्ट्रेट की तरफ से जांच के आदेश आते हैं, उसके बाद ही पुलिस एक्शन लेती है.

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ये भी पढ़ें: सजा और जुर्माना, मंत्री-विधायक या सांसद अगर मारता है थप्पड़ तो क्या होगा एक्शन? दिल्ली में गरमाया प्रवेश वर्मा का मामला

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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