BRICS Summit: राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के शीर्ष नेता इसमें शामिल हो रहे हैं. पुतिन के लिए आईटीसी मौर्या, शी जिनपिंग के लिए ताज पैलेस, यूएई के राष्ट्राध्यक्ष के लिए लीला पैलेस और मिस्र के दल के लिए शेरेटन होटल जैसे प्रमुख लग्जरी ठिकाने सज चुके हैं. ब्रिक्स जैसे विशाल अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में जब दुनिया भर के ताकतवर राष्ट्राध्यक्ष जुटते हैं तो उनके साथ सैकड़ों अधिकारियों, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया का एक विशाल लश्कर भी आता है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि इन विदेशी मेहमानों और उनके साथ आए विशाल दल के ठहरने, खाने-पीने और सुरक्षा का भारी-भरकम खर्च आखिर कौन उठाता है?
ब्रिक्स आयोजन का खर्च कौन उठाएगा?
ब्रिक्स संगठन की परंपरा के मुताबिक, शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाले देश पर ही इसके आयोजन का पूरा वित्तीय भार होता है. इस व्यवस्था के तहत भारत सरकार का विदेश मंत्रालय और संबंधित सरकारी विभाग बैठकों, वेन्यू प्रबंधन, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के स्वागत और जरूरी लॉजिस्टिक्स का खर्च वहन कर रहे हैं. वहीं सुरक्षा के कड़े व बहुस्तरीय बंदोबस्त की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से संभाल रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल के मुताबिक, यह पूरा खर्च दो हिस्सों में बंटा होता है-एक हिस्सा मेजबान देश उठाता है और दूसरा खुद अतिथि देश.
मेजबान देश के हिस्से आता है यह बुनियादी खर्च
सम्मेलन की मेजबानी कर रहा देश जैसे भारत अपने सरकारी खजाने और विदेश मंत्रालय के बजट से मुख्य व्यवस्थाएं करता है. इसके तहत मुख्य राष्ट्राध्यक्षों (राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री) और उनके कुछ गिने-चुने शीर्ष अधिकारियों के फाइव स्टार होटल के मुख्य सुइट और भोजन का खर्च मेजबान देश वहन करता है. इसके अलावा पूरे प्रतिनिधिमंडल को स्थानीय स्तर पर बुलेटप्रूफ गाड़ियां, सुरक्षा काफिला और 24 घंटे की पुख्ता सुरक्षा देना मेजबान की जिम्मेदारी होती है. एयरपोर्ट पर विदेशी विमानों की लैंडिंग, पार्किंग, मुख्य वेन्यू जैसे नई दिल्ली का भारत मंडपम और आधिकारिक रात्रिभोज का खर्च भी मेजबान ही भरता है.
अतिथि देश के हिस्से में आता है कौन सा खर्च?
राष्ट्राध्यक्ष के साथ आने वाले सैकड़ों लोगों के दल का बाकी खर्च संबंधित देश खुद अपनी जेब से भरता है. अपने मुल्क से आने-जाने वाले विशेष विमानों या कमर्शियल उड़ानों का ईंधन और टिकट खर्च अतिथि देश देता है. मुख्य वीवीआईपी के अलावा बाकी सभी जूनियर अधिकारियों, कमांडो और मीडिया कर्मियों के लिए बुक किए गए अतिरिक्त होटल कमरों का भारी-भरकम बिल भी वही देश चुकाता है. इतना ही नहीं, अगर कोई देश अपनी निजी बख्तरबंद गाड़ियां, खुद के शेफ या विशेष संचार उपकरण साथ लाता है तो उनके रखरखाव और ढुलाई का खर्च भी उसी देश को देना होता है.
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