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ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में फंसा पेंच, अब 'रनऑफ' में होगा लूला और बोल्सोनारो के बीच फैसला; जानिए क्या है ये चुनावी प्रक्रिया?

ब्राजील में मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए कराया जाता है. देश में लंबे समय से इन मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने चुनावी मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे और बिना सबूत उनके साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई थी.

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लैटिन अमेरिका का सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश है ब्रजील. (Photo: PTI)

ब्राजील में इन दिनों राष्ट्रपति चुनाव को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल है. इस चुनाव में मुकाबला मुख्य रूप से वर्तमान राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच बताया गया है. लूला वामपंथी वर्कर्स पार्टी से जुड़े हैं और चौथी बार राष्ट्रपति बनने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, फ्लावियो रूढ़िवादी लिबरल पार्टी के नेता हैं और अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया की बात करें तो भारत की तुलना में काफी अलग है.

50 प्रतिशत वोट नहीं, तो जीत नहीं

लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश ब्रजील में राष्ट्रपति का चुनाव दो चरणों में कराया जाता है. पहले चरण में कई उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं और पूरे देश में उन्हें मिले वोटों की गिनती की जाती है. अगर किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल जाते हैं तो वह पहले ही चरण में जीत जाता है. हालांकि, ऐसा बहुत कम देखने को मिलता है. अगर कोई भी प्रत्याशी बहुमत हासिल नहीं करता तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का चुनाव कराया जाता है.

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इलेक्ट्रॉनिक मशीन से होती है वोटिंग

ब्राजील में मतदान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के जरिए कराया जाता है. देश में लंबे समय से इन मशीनों का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ने चुनावी मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे और बिना सबूत उनके साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई थी. आपको बता दें कि ब्राजील में 18 से 70 वर्ष की उम्र के साक्षर नागरिकों के लिए मतदान करना अनिवार्य है. एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब 15.6 करोड़ से अधिक मतदाता हैं. मतदान नहीं करने वालों पर मामूली जुर्माना लगाया जा सकता है.

ब्राजील चुनाव में क्या है ‘रनऑफ’ प्रक्रिया?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्राजील में राष्ट्रपति का चुनाव दो चरणों में होता है. पहले चरण में कई उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरते हैं और देशभर में उन्हें मिले वोटों की गिनती की जाती है. अगर किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो वह पहले चरण में ही राष्ट्रपति चुन लिया जाता है. लेकिन अगर किसी को भी 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट नहीं मिलते, तो सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण यानी ‘रनऑफ’ चुनाव कराया जाता है. पहले चरण में ही जीत जाना आम नहीं है, लेकिन ऐसा पहले हो चुका है. 1990 के दशक में फर्नांडो हेनरिक कार्डोसो ने दो बार पहले चरण में ही 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल कर राष्ट्रपति चुनाव जीता था.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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