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नाना पाटेकर के गांव का इतिहास नहीं जानते होंगे आप! समंदर के बीच खड़ा है किला जिसे कोई जीत नहीं सका

Nana Patekar Birthplace: नाना पाटेकर के जन्म स्थल पर सन 1567 में तैयार किया गया किला आज भी मौजूद है. इस किले की खासियत यह है कि इसे एक पत्थर से तैयार किया गया था, जिसने मराठों, मुगलों, पुर्तगालियों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हमलों का सामना किया है. 

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मुरुड-जंजीरा अपने लोकप्रिय जंजीरा किले के लिए जाना जाता है, जो समुद्र के बीच एक चट्टान पर बना हुआ है. Image Credit- IMDB

नाना पाटेकर कल यानी 8 अक्टूबर को इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर उनसे जुड़ी चीजें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. अब उनके जन्मस्थल और वहां पर मौजूद 450 साल पुराने किले की काफी चर्चा हो रही है. बता दें, बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का जन्मस्थान भी महाराष्ट्र में है. उनके शहर से जुड़ा यह ऐतिहासिक समुद्री किला घूमने-फिरने और इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन हो सकता है. अगर आप महाराष्ट्र घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इस किले की कहानी और इसकी खासियतों के बारे में जानना दिलचस्प रहेगा.

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नाना पाटेकर के गांव का इतिहास  

नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ किले के पास मौजूद मुरुड-जंजीरा गांव में हुआ था. मुरुड-जंजीरा अपने लोकप्रिय और अजेय जंजीरा किले के लिए जाना जाता है, जो समुद्र के बीच एक चट्टान पर बना हुआ है. नाना पाटेकर का बचपन इसी मुरुड की गलियों और समुद्र के किनारों पर बीता है.

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समुद्र के बीच बना है ये ऐतिहासिक किला

मुरुद मुंबई से लगभग 150 किलोमीटर दूर मौजूद अपने समुद्र तट, नवाब के महल और सबसे ज्यादा मुरुद जंजीरा किले के लिए जाना जाता है. यह किला जमीन पर नहीं है, बल्कि अरब सागर से घिरे समुद्र तट के पास एक अंडाकार द्वीप पर मौजूद है. महाराष्ट्र का समुद्री तट कई पुराने किलों के लिए मशहूर है. इनमें से कुछ किले समुद्र के बीच चट्टानों पर बनाए गए थे, ताकि दुश्मनों के जहाजों पर नजर रखी जा सके.

किले का स्ट्रक्चर है बेहद मजबूत  

समुद्री किलों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूत दीवारें, एंट्री और समुद्र का नजारा दिखता है. हालांकि, समय के साथ किले का कुछ हिस्सा खंडहर में बदल गया, लेकिन आज भी ये ऐतिहासिक धरोहर के रूप में लोगों को एक्सप्लोर करने के लिए मजबूर करता है. हालांकि, इसका स्ट्रक्चर 450 साल से भी ज्यादा पुराना है, लेकिन इसके बाद भी यह आज भी समुद्र के बीच सीना ताने खड़ा है. 

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40 फीट ऊंचा है दरवाजा

आपको जानकर हैरानी होगी कि इस किले की न सिर्फ वास्तुकला खूबसूरत है, बल्कि किले की दीवारें और दरवाजे लगभग 40 फीट ऊंची हैं. यहां 26 तोपों वाले बुर्ज दर्ज किए गए हैं और इसका एंट्री गेट राजापुरी की ओर इस तरह बनाया गया था कि नजदीक पहुंचने तक वह आसानी से दिखाई न दे सके.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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