Sonam Wangchuk Education: दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक इस वक्त पूरे देश में चर्चा का विषय हैं. दरअसल, सोनम नीट यूजी पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तिफे की मांग कर रहे हैं. उन्होंने 28 जून को ये अनशन शुरू किया था और आज 18वां दिन है. उनकी तबीयत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन वे अनशन तोड़ने के लिए अब भी तैयार नहीं हैं. उनकी मांग है कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तिफा नहीं दे देते वे अनशन जारी रखेंगे. उनकी बिगड़ती तबीयत को देखकर देश के अलग-अलग हिस्सों से कई जानी-मानी हस्तियां अनशन तोड़ने की अपील कर रही हैं. इसी बीच लोगों के मन में ये भी सवाल पैदा हो रहा है कि सोनम वांगचुक कितने पढ़े-लिखे हैं, कहां से कौन सी डिग्री हासिल की और उनकी पारिवारिक स्थिति क्या थी. आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं.
सोनम वांगचुक की पढ़ाई-लिखाई
सोनम ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. इन सबके बीच एक हैरान करने वाली बात ये रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाया. खर्च उठाने के लिए वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करते थे. वे शुरू से ही संघर्षशील और आत्मनिर्भर स्वाभाव के थे. यही वजह है कि उन्होंने आगे चलकर देश ही नहीं पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई. सोनम इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद लद्दाख की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने में लग गए. साल 1988 में स्टूडेंट एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की स्थापना की और बच्चों को पारंपरिक रटंत सिस्टम से छुटकारा दिलाने के लिए सरल और व्यवहारिक प्रणाली विकास किया. उनका मकसद था कि बच्चों को उनकी भाषा और संस्कृति के आधार पर शिक्षा मिल सके. इसके बाद उन्होंने हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लद्दाख की स्थापना की जो कि आज वैकल्पिक शिक्षा और रिसर्च का एक बड़ा और अहम केंद्र है.
सोनम वांगचुक का परिवार
सोनम का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के एक गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम सोनम वांग्याल और माता का नाम शेरिंग था. बहुत ही साधारण परिवार में उनका पालन-पोषण हुआ है, जिस वजह से उन्होंने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया. बता दें कि उनके गांव में उस वक्त आधुनिक शिक्षा की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी. इसी वजह से वे 9 साल की उम्र तक स्कूल नहीं जा सके और उस उम्र तक घर में ही प्राथमिक शिक्षा हासिल की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें श्रीनगर जाना पड़ा था. श्रीनगर में भी उनके सामने एक अलग चुनौती आई वो ये थी कि उन्हें हिंदी और अंग्रेजी की समझ उस समय बहुत कम थी. इन दोनों भाषा को समझने में उन्हें शुरुआत में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. लेकिन अच्छी बात ये है कि इन सभी मुश्किलों के बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
सोनम वांगचुक की उपलब्धियां
उन्होंने लद्दाख में पानी की समस्या को लेकर एक बड़ा कदम उठाया. सोनम ने आइस स्तूपा तकनीक विकसित की, जो बर्फ से बनाए गए कुत्रिम ग्लेशियर की तरह काम करती है और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती है. इसकी मदद से सैकड़ों हेक्टेयर बंजर भूमी की सिंचाई हो पाई, जिससे वहां हजारों पेड़-पौधे और बगीचे लगाए गए. उनकी इस तकनीक को भारत ही नहीं पूरी दुनिया ने सराहा.
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