इस खबर से जुड़ी मुख्य जानकारियां:

  • जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक 8 पाने वाले कनिष्क जैन ने आईआईटी बॉम्बे सीएस के बजाय अमेरिका की एमआईटी यूनिवर्सिटी को चुना है.
  • पिछले सालों के टॉपर्स जैसे चिराग फालोर, चित्रांग मुर्डिया, महित गढ़ेवाला और साहिल अख्तर भी आईआईटी छोड़कर एमआईटी जा चुके हैं.
  • वर्ल्ड क्यूएस रैंकिंग 2027 में एमआईटी दुनिया में नंबर वन पर है, जबकि आईआईटी बॉम्बे 134वें स्थान पर आता है.
  • कनिष्क जैन का परिवार मूल रूप से कोटा का है और उनके माता-पिता दोनों ही आईटी सेक्टर से जुड़े हुए हैं.
  • टॉपर्स का कहना है कि वे वहां सिर्फ बेहतर रिसर्च और पढ़ाई के लिए जा रहे हैं, अमेरिका में बसने का उनका कोई इरादा नहीं है.

Topper Story: जेईई एडवांस्ड परीक्षा में टॉप रैंक हासिल करना देश के हर छात्र का सपना होता है. अमूमन टॉपर्स की पहली पसंद आईआईटी बॉम्बे का कंप्यूटर साइंस कोर्स होता है, जहां से देश-विदेश की दिग्गज कंपनियों में करोड़ों के पैकेज मिलते हैं. लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है. इस साल जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल करने वाले कनिष्क जैन ने आईआईटी बॉम्बे के बीटेक कंप्यूटर साइंस जैसे मलाईदार कोर्स को छोड़कर अमेरिका की प्रतिष्ठित एमआईटी यूनिवर्सिटी जाने का फैसला किया है. कनिष्क की एमआईटी में प्रवेश की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं.

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IIT छोड़कर MIT जाने का क्यों बन रहा है ट्रेंड?

कनिष्क जैन अकेले ऐसे छात्र नहीं हैं जिन्होंने यह कदम उठाया है, बल्कि बीते कुछ सालों से जेईई एडवांस्ड टॉपर्स का एमआईटी रुख करना एक बड़ा ट्रेंड बन गया है. कनिष्क से पहले पिछले साल 8वीं रैंक पाने वाले देवेश भैया भी एमआईटी जा चुके हैं. वहीं 2024 के टॉपर वेद लाहोटी भी आईआईटी बॉम्बे के पवई कैंपस में एक साल पढ़ाई करने के बाद इसे छोड़ चुके हैं. इससे पहले चिराग फालोर, चित्रांग मुर्डिया, निशंक अभंगी, महित गढ़ेवाला और साहिल अख्तर जैसे होनहार छात्रों ने भी आईआईटी को छोड़कर एमआईटी को चुना था.

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रिसर्च के बेहतर मौके और ग्लोबल रैंकिंग है बड़ी वजह

भारतीय छात्रों का आईआईटी छोड़कर विदेश जाने की सबसे बड़ी वजह वहां मिलने वाली रिसर्च की सुविधाएं हैं. कोटा के रहने वाले कनिष्क जैन की मां सरिता जैन के मुताबिक, कनिष्क फिजिक्स में रिसर्च करना चाहता है. एमआईटी में सेकेंड ईयर के बाद से ही रिसर्च वर्क शुरू कर दिया जाता है. वहीं 2024 के टॉपर वेद लाहोटी ने भी माना था कि ग्लोबल लेवल पर रिसर्च के मामले में आईआईटी अभी काफी पीछे हैं. वैश्विक स्तर पर यह टॉप 100 में भी नहीं है, इसलिए छात्र बेहतर करियर के लिए एमआईटी में आवेदन कर रहे हैं.

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ग्लोबल रैंकिंग में एमआईटी का दबदबा और आईआईटी की स्थिति

वर्ल्ड क्यूएस रैंकिंग 2027 में एमआईटी पिछले कई वर्षों से दुनिया में पहले पायदान पर काबिज है. इसके बाद इंपीरियल कॉलेज लंदन, ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज का नंबर आता है. इस वैश्विक सूची में भारत का सबसे बेहतरीन संस्थान आईआईटी दिल्ली 118वें और आईआईटी बॉम्बे 134वें स्थान पर आता है. हालांकि, एमआईटी जाने वाले ज्यादातर छात्रों का कहना है कि वे वहां सिर्फ बेहतर रिसर्च और पढ़ाई के लिए जा रहे हैं, अमेरिका में हमेशा के लिए बसने का उनका कोई इरादा नहीं है.

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एमआईटी (MIT) चुनने के बड़े फायदे (Benefits):

  • एमआईटी में छात्रों को ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही वर्ल्ड क्लास रिसर्च वर्क में शामिल होने का मौका मिल जाता है.
  • क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप पर होने के कारण यहां की डिग्री और एक्सपोजर को पूरी दुनिया में सबसे बेस्ट माना जाता है.
  • वेद लाहोटी जैसे कई होनहार भारतीय छात्रों को एमआईटी में पढ़ाई के लिए फुल्ली फंडेड स्कॉलरशिप का फायदा मिलता है.
  • छात्रों को दुनिया भर के बेहतरीन प्रोफेसर्स और अलग-अलग देशों के टॉप माइंड्स के साथ नेटवर्क बनाने का अवसर मिलता है.
  • यहां थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल और इनोवेटिव सोच को बढ़ावा दिया जाता है, जो साइंटिस्ट या रिसर्चर बनने के लिए जरूरी है.