IPS Akash Kulhari: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसमें न केवल नॉलेज बल्कि दृढ़ता और धैर्य की भी परीक्षा होती है। इसलिए पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को पास करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसे हर साल बहुत कम लोग ही हासिल कर पाते हैं।
कौन हैं IPS आकाश कुल्हारी?
UPSC में हासिल हर सफलता की कहानी अनोखी और अलग होती है। उम्मीदवारों की उपलब्धियां वर्षों के समर्पण, प्रयास और व्यक्तिगत त्याग को दर्शाती हैं। इन प्रेरक यात्राओं में, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी आकाश कुल्हारी की कहानी उनके उल्लेखनीय दृढ़ संकल्प और परीक्षा की तैयारी के दौरान असाधारण चुनौतियों को पार करने की क्षमता के लिए सबसे अलग है।
10वीं में आए 57%, स्कूल ने एडमिशन देने से किया मना
राजस्थान के बीकानेर में जन्मे और पले-बढ़े आकाश अपने शुरुआती वर्षों में एक मेधावी छात्र नहीं थे। अपनी कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में, उन्होंने केवल 57 प्रतिशत अंक प्राप्त किए और स्कूल ने उन्हें 11वीं कक्षा में एडमिशन देने से मना कर दिया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “10वीं के परिणाम आने के बाद मुझे स्कूल से निकाल दिया गया, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।” रिपोर्ट के अनुसार, उनके खराब प्रदर्शन के कारण उनके माता-पिता को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
नए स्कूल में की मेहनत; 12वीं में लाए 85%
स्कूल से निष्कासित होने के बाद आकाश ने केन्द्रीय विद्यालय में एडमिशन ले लिया, जहां उन्होंने उल्लेखनीय बदलाव किया। उन्होंने 12वीं कक्षा में 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने बीकानेर के दुग्गल कॉलेज से B.com और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ सोशल साइंस से मास्टर डिग्री हासिल की। उन्होंने जेएनयू से M.Phil की डिग्री भी हासिल की है।
पहले प्रयास में क्रैक किया UPSC, बनें IPS
जेएनयू में पढ़ाई के दौरान उन्होंने यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की और 2005 में अपने पहले प्रयास में ही सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 273 हासिल की। इसके बाद, साल 2006 में वे उत्तर प्रदेश कैडर में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हो गए। पिछले कई वर्षों से उन्होंने ईमानदारी और समर्पण के साथ देश की सेवा की है। वे वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) मुख्यालय में लोक शिकायत के महानिरीक्षक (IG) के पद पर हैं।
मां के कारण लिया सिविल सेवा में आने का निर्णय
इंटरव्यू के दौरान अपनी प्रेरणा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “ग्रेजुएशन के बाद मेरे सामने दो करियर विकल्प थे। पहला यह कि मैं MBA करूं और कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी करूं और दूसरा विकल्प सिविल सेवा की तैयारी करूं। मेरी मां चाहती थीं कि मेरे बच्चे अफसर बनकर देश की सेवा करें, इसलिए मां की इच्छा का सम्मान करते हुए मैंने सिविल सेवा की परीक्षा देने का फैसला किया।
छोटा भाई भी नक्शे कदम पर
जब मुझे पहले प्रयास में सफलता मिली तो छोटे भाई ने भी यही रास्ता चुना, वह भी आज अफसर है। आकाश कुल्हारी की सफलता एक मिसाल बन चुकी है, जो यह दर्शाती है कि शुरुआती शैक्षणिक प्रदर्शन में खराब प्रदर्शन आपके भाग्य को परिभाषित नहीं करता है। समर्पण और सही मानसिकता के साथ, कोई भी इंसान मुश्किल से मुश्किल चुनौतियों को भी पार कर सकता है और सफलता का रास्ता बना सकता है।