ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों और पलटवार के बीच मिडिल ईस्ट में उपजे संकट के बीच दुनियाभर के कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया था. इस संकट से भारत भी अछूता नहीं रहा और एलपीजी से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सरकार को इजाफा करना पड़ा. कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये से भी अधिक कीमत पर बिक रहा है, लेकिन ईंधन इंडस्ट्री में उस समय खलबली मच गई. जब मिडिल ईस्ट में शांति के बाद भारत की निजी पेट्रोलियम कंपनी नायरा ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपये और डीजल की कीमतों में 3 रुपये की कटौती की.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: New EPF Rule: पीएफ खाते में हैं ₹10 लाख? अब आसानी से निकाल सकेंगे ₹7.5 लाख, सरकार ने जारी किया नया नियम

---विज्ञापन---

हरदीप सिंह पुरी ने क्या कहा?

निजी कंपनी की इस कटौती के बाद अब देश के नागरिकों की नजर सरकारी कंपनियों पर टिकी हुई है, लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती होगी. नागरिकों की उम्मीद उस समय और बढ़ गई जब केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि घरेलू ईंधन की दरों में कमी तभी दिखाई दे सकती है जब कच्चे तेल की कीमतें वर्तमान स्थिति की तरह स्थिर रहेंगी. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकिया में 2 से 3 महीने तक का समय लग सकता है.

---विज्ञापन---

महंगे स्टॉक का तेल बेच रही कंपनियां

हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने ऐसे समय पर पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम दाम पर बेचा, जिससे 30 जून तक कुल मिलाकर लगभग 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. केंद्रीय मंत्री पुरी ने आगे कहा कि वर्तमान में जो कच्चा तेल प्रोसेसिंग में है, वह स्टॉक है जिसे कंपनियों ने दो महीने पहले खरीदा था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची थीं. उन्होंने कहा, 'हम आज वही कच्चा तेल इस्तेमाल कर रहे हैं जो हमने दो महीने पहले खरीदा था. अगर यह गिरावट 2–3 महीने तक जारी रहती है तो हम रिजल्ट देखेंगे.'

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: EPFO Website Down: तारीख पर तारीख! आज भी नहीं खुली EPFO की वेबसाइट, अब इस दिन शुरू होगी सर्विस

---विज्ञापन---