हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को अचानक ब्लडबाथ (ब्लैक फ्राइडे) जैसी स्थिति देखने को मिली। दोपहर 3 बजे तक बाजार में स्थिति सामान्य थी, लेकिन आखिरी के आधे घंटे में अचानक ऐसी आक्रामक बिकवाली आई जिसने दोनों बेंचमार्क इंडेक्स (सेंसेक्स और निफ्टी) को धराशायी कर दिया।
इस जोरदार गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,092.06 अंक (1.44%) टूटकर 74,775.74 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी50 भी 359.40 अंक (1.5%) का गोता लगाकर 23,547.75 पर बंद हुआ। गौरतलब है कि आज सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर (76,220.02) से करीब 1,450 अंक और निफ्टी (24,002.8) से करीब 455 अंक नीचे आ गिरा। बाजार का रुख इस कदर कमजोर था कि बीएसई पर बढ़ने वाले 1,568 शेयरों के मुकाबले 2,507 शेयर लाल निशान में बंद हुए। इस गिरावट ने पूरे मई महीने के रिटर्न पर पानी फेर दिया और निफ्टी इस महीने 1.9% और सेंसेक्स 2.8% के नुकसान में बंद हुआ।
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आखिरी वक्त में अचानक क्यों क्रैश हुआ बाजार? ये हैं 4 मुख्य कारण:
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर बढ़ता सस्पेंस
बाजार में आई इस अचानक गिरावट का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए होने वाले शांति समझौते (Peace Arrangement) पर बढ़ी अनिश्चितता है। मार्च की बड़ी गिरावट के बाद अप्रैल में बाजार ने अच्छी रिकवरी की थी, लेकिन अब निवेशकों को डर है कि पश्चिम एशिया (Middle East) का यह भू-राजनीतिक तनाव लंबा खिंच सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक यह विवाद पूरी तरह शांत नहीं होता, भारतीय शेयरों में लगातार बढ़त देखना मुश्किल है। इसी डर से निवेशकों ने मुनाफावसूली (Profit-Booking) करना बेहतर समझा।
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आखिरी 30 मिनट में 'MSCI रीबैलेंसिंग' का तगड़ा झटका
दोपहर 3 बजे के बाद बाजार में आई सुनामी की सबसे बड़ी वजह MSCI (Morgan Stanley Capital International) के मई इंडेक्स में हुआ बदलाव था, जो आज बाजार बंद होने के वक्त लागू हुआ। रीबैलेंसिंग के दिन, इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स (Passive Funds) आखिरी वक्त में अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करते हैं, जिससे भारी उतार-चढ़ाव आता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस रीबैलेंसिंग के बाद 'MSCI इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स' में भारत का वेटेज (भारांश), जो जुलाई 2024 में लगभग 20% था, अब घटकर करीब 11.2% रहने का अनुमान है। इसी वजह से बड़े हैवीवेट शेयरों में अंधाधुंध बिकवाली हुई।
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कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अब भी सिरदर्द
भले ही मई के दौरान ब्रेंट क्रूड वायदा में लगभग 19% की नरमी आई है, लेकिन तेल की कीमतें अभी भी ईरान संघर्ष से पहले के स्तर से 27% से अधिक ऊंची हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में महंगी ऊर्जा सीधे तौर पर देश में महंगाई बढ़ाती है और चालू खाता घाटे (CAD) को नुकसान पहुंचाती है। यह डर भी निवेशकों को शेयर बाजार से दूर रख रहा है।
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हैवीवेट शेयरों में भारी गिरावट और विदेशी निवेशकों की बेरुखी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारतीय शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन और वैश्विक बाजारों में एआई (AI) आधारित रैली की कमी के कारण बेहद चुनिंदा शेयरों में ही निवेश कर रहे हैं। आज बाजार के दिग्गजों पर भारी दबाव रहा:
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): इस हैवीवेट शेयर में इस महीने 7.7% की भारी गिरावट आई, जिसने इंडेक्स को नीचे खींचने में बड़ी भूमिका निभाई।
सेक्टर का हाल: फाइनेंशियल स्टॉक्स 1.2% और आईटी (IT) स्टॉक्स 0.9% टूट गए।
ONGC और ITC: ओएनजीसी (ONGC) में मुनाफावसूली और प्रोजेक्ट देरी के कारण इस महीने 11.4% की गिरावट आई, जबकि आईटीसी (ITC) सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद वॉल्यूम घटने की आशंका से 8.9% लुढ़क गया।
इस मंदी में भी इन शेयरों ने मचाया धमाल!
बाजार में मची इस चौतरफा तबाही के बीच कुछ शेयर अंगद के पैर की तरह मजबूती से खड़े रहे:
अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises): अमेरिकी अधिकारियों द्वारा गौतम अडानी पर लगे फ्रॉड के आरोपों को खारिज करने (ड्रॉप करने) के बाद इस शेयर ने इस महीने 22% की बंपर छलांग लगाई।
मेटल स्टॉक्स की चांदी: ईरान संकट के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों और घरेलू मांग मजबूत होने से मेटल सेक्टर चमका। हिंडालको (Hindalco) 8.6% और नेशनल एल्युमिनियम (National Aluminium) 6.3% की बढ़त के साथ बंद हुए।