Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026: भारत सरकार देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने और विदेशी निवेश (Foreign Investment) को आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. मौजूदा संसदीय सत्र के दौरान सरकार संसद में टैक्सेशन एंड दर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश कर सकती है. इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य देश में मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) को बढ़ावा देना और विदेशी निवेशकों को टैक्स में बड़ी राहत देना है.
आइए, समझते हैं कि इस नए बिल में क्या खास है और इससे देश व शेयर बाजार पर क्या असर पड़ेगा.
इस बिल में क्या-क्या मुख्य बदलाव प्रस्तावित हैं?
सरकार इस विधेयक के जरिए टैक्स नियमों में कई राहत देने की योजना बना रही है.
पहला: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 2041 तक टैक्स छूट
मौजूदा आयकर अधिनियम के तहत कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के लिए टैक्स छूट की सीमा 2031 में खत्म हो रही थी. सरकार इसे बढ़ाकर 2041 तक करने पर विचार कर रही है. इसका सीधा फायदा मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट और सर्वर जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनियों और उनके विदेशी सप्लायर्स को मिलेगा.
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दूसरा : विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) को बड़ी राहत
REITs, InvITs, और डेटा सेंटर: इन क्षेत्रों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को टैक्स में विशेष छूट दी जाएगी.
सरकारी बॉन्ड: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को सरकारी सिक्योरिटीज/इक्विटी से मिलने वाले ब्याज और उनके ट्रांसफर/बिक्री पर होने वाले कैपिटल गेन (Capital Gain) पर टैक्स छूट देने वाला नियम कानून में बदला जा सकता है.
हीरा खनन क्षेत्र (Diamond Mining): इस सेक्टर को भी टैक्स छूट का लाभ देने पर मंजूरी ली जा सकती है.
इस नए कदम से क्या-क्या फायदे होंगे?
विदेशी फंड की वापसी: हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली को रोकने और भारतीय बाजार में उनका भरोसा वापस लाने में मदद मिलेगी.
रुपये को मजबूती: विदेशी मुद्रा (डॉलर) के आगमन से भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी.
वैश्विक तनाव से सुरक्षा: अमेरिका-ईरान जैसे वैश्विक संघर्षों और बाहरी आर्थिक झटकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच मिलेगा.
शेयर बाजार में तेजी: अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो भारतीय स्टॉक मार्केट में विदेशी निवेशकों (FIIs) की जोरदार वापसी हो सकती है, जिससे शेयर बाजार में अच्छी बढ़त देखने को मिल सकती है.
संसद में पेश करने की चुनौती
वित्त मंत्री के इस बिल को 13 अगस्त तक चलने वाले मौजूदा संसदीय सत्र में पेश किए जाने की संभावना है. हालांकि, परीक्षा पेपर लीक और छात्र विरोध प्रदर्शनों जैसे मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई है. सत्र समाप्त होने में अब बहुत कम समय बचा है, फिर भी सरकार पर इन टैक्स सुधारों को जल्द से जल्द पास कराने का दबाव है.
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