Sugar Price Hike: त्योहारों का मौसम शुरू होने से ठीक पहले देश में चीनी के दामों में अचानक बड़ा उछाल देखा जा रहा है. रसोई बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. जहां कुछ समय पहले तक खुदरा बाजार में चीनी 45-48 रुपये प्रति किलो के आसपास मिल रही थी, वहीं अब सरकारी औसतों से लेकर स्थानीय बाजारों में कीमतें तेजी से बदली हैं. आइए समझते हैं कि देश के प्रमुख शहरों में आज चीनी का क्या रेट है, दाम क्यों बढ़ रहे हैं और क्या 2026 में चीनी और महंगी होगी.
प्रमुख राज्यों और शहरों में चीनी के दाम
असम, राजस्थान, बिहार, यूपी, दिल्ली समेत देशभर में चीनी के खुदरा (Retail) और थोक (Mandi) दामों में अंतर देखा जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार राष्ट्रीय औसत खुदरा मूल्य लगभग 55 से 56 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है, जबकि कई स्थानीय किराना दुकानों पर यह 55 से 65 रुपये प्रति किलो और सुपरफास्ट डिलीवरी/प्रीमियम ब्रांड्स पर 70-80 रुपये तक बिक रही है.
---विज्ञापन---
चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
देश में अचानक चीनी की कीमतें बढ़ने के 4 सबसे बड़े कारण हैं. पहला कारण है उत्पादन में गिरावट और खराब मौसम. पिछले सीजन में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में असमान बारिश और मौसम की मार के कारण कुल चीनी उत्पादन अनुमान से कम रहा है. दूसरी वजह है त्योहारों की मांग (Festive Demand). रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के आने से हलवाइयों, मिठाई निर्माताओं और आम उपभोक्ताओं की तरफ से चीनी की मांग तेजी से बढ़ी है. तीसरा कारण एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Diversion) बना है.
---विज्ञापन---
पाकिस्तान में कितना होता है चीनी का उत्पादन? दुनिया में किस नंबर पर है देश
सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत कुल गन्ने और शीरे का एक बड़ा हिस्सा (लगभग 30-34 लाख टन) एथेनॉल बनाने में डाइवर्ट किया गया, जिससे चीनी का शुद्ध स्टॉक कम हुआ. सबसे आखिरी वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चीनी की कीमतों में लगातार तेजी. वैश्विक स्तर पर भी चीनी की कमी (Global Deficit) के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतें पिछले दो महीनों में 16% से ज्यादा बढ़ी हैं.
---विज्ञापन---
भारत चीनी आयात क्यों कर रहा है?
भारत दुनिया में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता है. फिर भी सरकार को चीनी आयात की अनुमति देनी पड़ी है. दरअसल, त्यौहारी सीजन के दौरान देश में चीनी की कोई कमी (Shortage) न हो और दामों को नियंत्रण में रखा जा सके, इसके लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 10 लाख टन (1 Million Tonnes) रॉ शुगर (Raw Sugar) को बिना ड्यूटी (Duty-Free TRQ) आयात करने की अनुमति दी है.
‘देश में चीनी की किल्लत नहीं, आने वाले दिनों में…’, भारतीय चीनी मिल संघ का बड़ा बयान
---विज्ञापन---
अब सवाल ये उठता है कि क्या भारत में चीनी की भारी किल्लत हो गई है? नहीं, देश में चीनी का पूरी तरह अकाल नहीं है, लेकिन अक्टूबर में नया पेराई सीजन (Crushing Season) शुरू होने से पहले बफर स्टॉक को मजबूत करने के लिए यह कदम pre-emptive (एहतियातन) उठाया गया है ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी पर लगाम लग सके.
भारत से कौन चीनी खरीदता है?
हालांकि हाल ही में घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार ने निर्यात पर शर्तें सख्त की हैं, फिर भी भारत पारंपरिक रूप से कुछ देशों को चीनी का निर्यात (Export) करता रहा है. इसमें एशियाई देश जैसे कि बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, श्रीलंका और नेपाल शामिल हैं. इसके अलावा मिडिल ईस्ट और अफ्रीका के संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सूडान, सोमालिया और मिस्र को भी चीनी निर्यात होता है.
---विज्ञापन---
क्या 2026 में चीनी और महंगी होगी?
अगस्त से अक्टूबर 2026 के दौरान फेस्टिव सीजन होने के कारण खुदरा कीमतें 55 से 62 रुपये प्रति किलो के आसपास बनी रहने का अनुमान है. 10 लाख टन के आयात, स्टॉक लिमिट (Stock Limits) और 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई जल्दी शुरू कराने की सरकारी सलाह से कीमतों में और बहुत बड़ा उछाल रुकने की संभावना है. अगर अगले सीजन में गन्ने की नई फसल (New Crop) अच्छी रहती है और एथेनॉल एलोकेशन संतुलित रहता है, तो नवंबर 2026 के बाद कीमतें वापस 48-52 रुपये प्रति किलो के स्थिर स्तर पर आ सकती हैं.