आज के डिजिटल दौर में हमारी जेब से पर्स और कैश लगभग गायब ही हो चुका है. सब्जी वाले की दुकान हो, चाय का टपरी वाला हो या शॉपिंग मॉल—हर जगह हमारा हाथ जेब में फोन तलाशता है और क्यूआर कोड स्कैन (QR Code Scan) करके कुछ ही सेकंड में पेमेंट हो जाता है.

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह 10, 20 और 50 रुपये की आसान चुटकी आपकी जेब में कितना बड़ा छेद कर रही है? हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 81% लोग रोजाना UPI का इस्तेमाल करते हैं और एक औसतन व्यक्ति हर दिन UPI के जरिए करीब 200 रुपये का ट्रांजैक्शन कर देता है.

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आइए, समझते हैं कि कैसे UPI की सहूलियत हमारे दिमाग से सोचने का समय छीन रही है और साल में हम बिना वजह कितना पैसा उड़ा देते हैं.

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हाथ से कैश जाने का दर्द VS UPI का स्कैन एंड भूल जाओ

जब आप अपनी जेब से 100 रुपये का करारा नोट निकालकर किसी को देते हैं, तो आपके दिमाग में एक छोटा सा सिग्‍नल जाता है - भाई, पैसे कम हो रहे हैं. इसे साइकोलॉजी में पेन ऑफ पेइंग (Pain of Paying) कहते हैं.

लेकिन UPI में क्या होता है? आपने फोन निकाला, स्कैनर के सामने रखा, PIN डाला और काम खत्म. न नोट गिना, न छुट्टे पैसों का झंझट. इसी बिना दर्द वाले पेमेंट के चक्कर में हम वो फालतू चीजें भी खरीद लेते हैं जिनकी हमें वाकई जरूरत नहीं होती. जैसे शाम को घूमते-घूमते बेवजह 50 रुपये की कोल्ड कॉफी पी लेना या 20 रुपये का स्‍नैक्स खा लेना.

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गणित समझिए: साल भर में कितनी होगी बचत?
अगर आप हर दिन औसतन 200 का ट्रांजैक्शन UPI से करते हैं तो एक महीने का खर्च: 200×30= 6000 रुपये. इसमें से करीब 900 रुपये से 1200 रुपये केवल इसलिए खर्च होते हैं क्योंकि पेमेंट करना बेहद आसान था. अगर आप सिर्फ इस बेवजह के खर्च पर लगाम लगा लें, तो आप साल में 10800 रुपये से 14400 रुपये यानी लगभग 15000 रुपये तक आसानी से बचा सकते हैं.

तो क्या UPI चलाना पूरी तरह बंद कर दें?
UPI बंद करना इसका सही समाधान नहीं है, क्योंकि इसने हमारी जिंदगी को बेहद आसान और सुरक्षित बनाया है. समाधान है- अपनी आदतों पर कंट्रोल करें. राशन, दूध, बिजली-पानी का बिल और ट्रैवल जैसे जरूरी कामों के लिए UPI का इस्तेमाल जारी रखें. ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर खाने या फालतू खर्चों के लिए UPI ऐप या बैंक में साप्ताहिक या मासिक स्पेंडिंग लिमिट (Spending Limit) सेट कर दें.

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अगर आपको लगता है कि आप शाम की चाय-नाश्ते में ज्यादा स्कैन करते हैं, तो हफ्ते का 500 रुपये कैश जेब में रखें और उसी से खर्च करें.

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