शेयर बाजार के निवेशकों के लिए आज यानी 24 फरवरी 2026 की सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. आज की सुबह को ब्लैक ट्यूजडे कहा जा सकता है. पिछले कुछ समय से रिकवरी की कोशिश कर रहे बाजार को वैश्विक संकेतों ने तगड़ा झटका दिया है. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में ऐसी गिरावट आई कि देखते ही देखते निवेशकों के 4 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. सेंसेक्स 800 अंकों से ज्यादा टूटकर 82,451 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी ने भी 25,500 का साथ छोड़ दिया.
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बाजार में भारी गिरावट की 5 बड़ी वजहें
- ट्रंप का 'टैरिफ वार' और नई आक्रामकता
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ट्रंप के कुछ टैरिफ नियमों को रद्द कर दिया था, लेकिन इससे मामला सुलझने के बजाय और उलझ गया है. रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब और भी आक्रामक रुख अपना रहा है. आज ट्रंप अपना स्टेट ऑफ द यूनियन (State of the Union) भाषण देने वाले हैं, जिसमें वे विदेशी देशों को ऊंचे टैरिफ की धमकी दे सकते हैं. इस टैरिफ ड्रामे ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है. - अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तनातनी
ईरान में चल रहे हिंसक प्रदर्शन और वहां की सरकार की कार्रवाई के बाद तनाव चरम पर है. अमेरिका ने ईरान को सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. हालांकि 26 फरवरी को परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) होनी है, लेकिन तब तक अनिश्चितता के माहौल ने निवेशकों को प्रॉफिट बुकिंग के लिए मजबूर कर दिया है. - आईटी (IT) शेयरों में महा-गिरावट
भारतीय आईटी सेक्टर के लिए फरवरी का महीना किसी आपदा से कम नहीं रहा. निफ्टी आईटी इंडेक्स आज अकेले 4% तक टूट गया. एआई (AI) के कारण होने वाले बदलावों का डर और अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों ने टेक कंपनियों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. फरवरी में अब तक आईटी स्टॉक्स 20% तक गिर चुके हैं. - कच्चा तेल (Crude Oil) हुआ महंगा
कच्चे तेल की कीमतें 1% बढ़कर $72 प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जो 6 महीने का उच्च स्तर है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है. तेल महंगा होने का मतलब है, ज्यादा महंगाई, कमजोर रुपया और इकोनॉमी पर दबाव. यही वजह है कि बाजार को कच्चे तेल की यह बढ़त रास नहीं आ रही. - डॉलर की मजबूती और FII का डर
डॉलर इंडेक्स एक बार फिर 98 के स्तर की ओर बढ़ रहा है. जब-जब डॉलर मजबूत होता है, विदेशी निवेशक (FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बाजारों में ले जाते हैं. डॉलर की इस मजबूती से भारतीय बाजार में विदेशी फंड्स के आने का सिलसिला रुक सकता है.
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निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
बाजार इस समय वेट एंड वॉच (Wait and Watch) की स्थिति में है. आज शाम होने वाला अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण और 26 फरवरी की ईरान वार्ता तय करेगी कि बाजार यहां से संभलेगा या गिरावट और गहरी होगी. फिलहाल, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस उठा-पटक के बीच बहुत ज्यादा आक्रामक होकर खरीदारी करने से बचना चाहिए.