अगर आप होम लोन, कार लोन या किसी भी तरह की बैंक ईएमआई (EMI) दे रहे हैं, तो आपके लिए अगला कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक सोमवार, 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है. बाजार के जानकारों और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस बार भी रिजर्व बैंक रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं करेगा.
आइए, जानते हैं कि आरबीआई की इस बैठक में क्या फैसला हो सकता है और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.
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रेपो रेट क्यों नहीं बदलने का अनुमान है?
विशेषज्ञों का कहना है कि रिजर्व बैंक का मुख्य ध्यान घरेलू महंगाई दर को काबू में रखने और देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने पर रहेगा. ईरान संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे थोक और खुदरा महंगाई दर पर दबाव दिख रहा है. अमेरिका का फेडरल रिजर्व (US Fed) सख्त रुख अपनाए हुए है. अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहने से भारतीय और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर कम हुआ है.
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इन परिस्थितियों में आरबीआई आक्रामक रुख अपनाने या तुरंत दरें घटाने के बजाय वेट एंड वॉच (इंतजार करो और देखो) की नीति अपना सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक आरबीआई का फैसला वैश्विक केंद्रीय बैंकों के बजाय भारत की अपनी आर्थिक परिस्थितियों पर ज्यादा आधारित होगा. आरबीआई बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी (नगदी) बनाए रखेगा.
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अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहता है, तो चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही (Second Half) में ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत आ सकती है, लेकिन फिलहाल तुरंत दरें बढ़ने की आशंका कम है.
खुदरा महंगाई दर (CPI) चालू वित्त वर्ष में 4.9 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है. ऐसे में अगस्त में दरें स्थिर रह सकती हैं, लेकिन दिसंबर की बैठक में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी का विचार किया जा सकता है.
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आम आदमी की ईएमआई पर क्या असर पड़ेगा?
अगर आरबीआई रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के स्थिर रखता है, तो आपकी मौजूदा होम लोन या कार लोन की ईएमआई (EMI) फिलहाल जैसी है वैसी ही रहेगी. दरों में कटौती न होने से ईएमआई कम तो नहीं होगी, लेकिन ब्याज दरें न बढ़ने से तुरंत बोझ भी नहीं बढ़ेगा.