RBI Repo Rate Hike: अगर आप होम लोन या कार लोन की ईएमआई भरते हैं तो आने वाले महीने में आपकी जेब पर बोझ बढ़ सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर अक्टूबर की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी में ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव काफी बढ़ गया है. यस बैंक की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' के सख्त रुख और दोनों देशों के बीच ब्याज दरों के घटते अंतर की वजह से यह स्थिति बनी है.

अक्टूबर में क्यों बढ़ सकती हैं ब्याज दरें?

यस बैंक की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में आरबीआई द्वारा रेपो रेट बढ़ाए जाने की संभावना अब काफी बढ़ चुकी है. हालांकि, रिजर्व बैंक का अंतिम फैसला देश में विकास दर और महंगाई के आंकड़ों पर ही निर्भर करेगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मजबूत कीमतें, अगस्त में खुदरा महंगाई (CPI) का बढ़ना और कोर इन्फ्लेशन में उछाल ऐसे बड़े कारण हैं, जो आरबीआई को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर सकते हैं.

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अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का भारत पर असर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में सर्वसम्मति से अपनी नीतिगत ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद वहां ब्याज दरें 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में आ गई हैं. अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने साफ संकेत दिए हैं कि वह महंगाई को काबू करने के लिए दिसंबर में भी 0.25% की और बढ़ोतरी कर सकता है. अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने से भारत और अमेरिका के बीच दरों का अंतर कम हो गया है. इसका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ रहा है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं.

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लिक्विडिटी पर रहेगी आरबीआई की नजर

रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि ब्याज दर में किसी भी बढ़ोतरी का असर इस बात पर तय होगा कि आरबीआई बाजार से अतिरिक्त नकदी को कितनी कुशलता से संभालता है. वर्तमान में वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) 5.05 प्रतिशत के स्तर पर है. ऐसे में अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट को लेकर कोई भी ठोस कदम उठाने से पहले रिजर्व बैंक बाजार के लिक्विडिटी स्तर को बारीकी से परखेगा.

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