अगर आप सोच रहे हैं कि शुक्रवार को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई 3 रुपये की बढ़ोतरी आखिरी थी, तो सावधान हो जाइए। अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में ₹10 प्रति लीटर तक का और इजाफा हो सकता है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में लगी आग ने भारतीय तेल कंपनियों की कमर तोड़ दी है।
तेल कंपनियों को हर लीटर पर 18 रुपये का घाटा
फाइनेंशियल सर्विस कंपनी एमके ग्लोबल (Emkay Global) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) फिलहाल पेट्रोल और डीजल की हर लीटर बिक्री पर 17 से 18 रुपये का नुकसान झेल रही हैं। इस तिमाही में तेल कंपनियों को करीब 57000 से 58000 करोड़ रुपये का भारी घाटा होने का अनुमान है।
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कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में 10 रुपये की बढ़ोतरी जरूरी है। यह बढ़ोत्तरी या तो एक बार में की जा सकती है या अगले 2-3 हफ्तों में धीरे-धीरे (Creeping Hikes) लागू होगी।
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महंगाई का चौतरफा हमला: सिर्फ तेल ही नहीं, दूध भी महंगा
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल तेल ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतें भी घर का बजट बिगाड़ने वाली हैं।
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दूध की मार: अमूल और मदर डेयरी ने पहले ही दूध के दाम ₹2 प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं, जिससे परिवारों का मासिक खर्च बढ़ गया है।
महंगाई दर (Inflation): विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन और दूध की कीमतों में इस संयुक्त बढ़त से खुदरा महंगाई दर में 0.42% का उछाल आ सकता है।
ट्रांसपोर्टेशन: जब पेट्रोल-डीजल महंगा होता है, तो मालभाड़ा, कैब, ऑटो और लॉजिस्टिक्स का खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाती हैं।
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
कच्चे तेल में हर $10 की बढ़त भारत के व्यापार घाटे को बढ़ाती है और महंगाई को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। ईंधन कीमत की बढ़त का सीधा असर तो पड़ेगा ही, लेकिन ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाने-पीने की चीजों पर भी इसका असर दिखेगा। अब औसत महंगाई दर 4.6% से 5.0% के बीच रह सकती है।
हालांकि सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल-डीजल के आयात पर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी घटाई थी, लेकिन कच्चे तेल के $105 के पार जाने से वह राहत अब बेअसर साबित हो रही है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव (अमेरिका-ईरान विवाद) ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।