वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक डराने वाली खबर सामने आई है। प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज (Emkay Global) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो अगले 3 से 6 महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 18 से 20 रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
क्यों बढ़ सकते हैं दाम? रिपोर्ट की मुख्य बातें:
तेल कंपनियों का बढ़ता नुकसान (Under-recoveries):
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का क्रूड बास्केट फिलहाल $110 प्रति बैरल के आसपास है। 27 मार्च 2026 को सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती के बावजूद, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 18 रुपये से 20 रुपये का नुकसान हो रहा है।
किस्तों में हो सकती है बढ़ोतरी:
एमके ग्लोबल का अनुमान है कि सरकार एक साथ बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय इसे चरणों में लागू कर सकती है। पहले दौर में 10 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की संभावना जताई गई है। यह कदम कंपनियों के घाटे को कम करने और महंगाई को नियंत्रित रखने के बीच संतुलन बनाने के लिए उठाया जा सकता है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट:
ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में देरी और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी ब्लॉकेड ने कच्चे तेल की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। यदि यह गतिरोध बना रहता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिसका सीधा असर भारतीय पंपों पर दिखेगा।
अर्थव्यवस्था और बाजार पर क्या होगा असर?
- महंगाई का खतरा : अनुमान है कि 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति (Inflation) में करीब 75 बेसिस पॉइंट (0.75%) का इजाफा हो सकता है।
- शेयर बाजार में गिरावट का डर: ईंधन के दाम बढ़ने से लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ेगी, जिससे शेयर बाजार में अल्पावधि के लिए सुधार (Correction) देखा जा सकता है। रिपोर्ट में उन स्टॉक्स की सूची भी दी गई है जिन पर इस बढ़ोतरी का नकारात्मक असर पड़ सकता है, विशेष रूप से पेंट, टायर और ऑटोमोबाइल सेक्टर।
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क्या सरकार देगी राहत?
हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय ने फिलहाल किसी भी तत्काल मूल्य वृद्धि की खबरों का खंडन किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते लंबे समय तक कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल होगा। मार्च में दी गई ₹10 की एक्साइज ड्यूटी राहत ने सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर पहले ही दबाव बढ़ा दिया है।
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