Petrol Price Down: इस देश में पेट्रोल के गिरे दाम, भारत का नंबर कब आएगा?

Fuel Price: अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी हुई है। इसके बावजूद भारत की तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर कीमतों में कोई कटौती अब तक नहीं की है। देश में पेट्रोल के दाम पहले से ही काफी ज्यादा चल रहे हैं।

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Petrol Diesel Price: भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर हैं। देश के कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बिक रहा है। डीजल भी इससे ज्यादा पीछे नहीं है। लंबे समय से जनता तेल के दामों में कमी की आस लगाए बैठी है, लेकिन तेल कंपनियां उसे राहत देने को तैयार नहीं हैं। इस बीच, पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सरकार ने आवाम को इस मोर्चे पर कुछ राहत दी है।

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कितनी हुई कटौती?

पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल सस्ता हुआ है। स्थानीय सरकार का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का फायदा जनता को देने के लिए पेट्रोल और डीजल के दाम कम किए गए हैं। पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, डीजल की कीमत में 5.31 रुपये की कमी की गई है। जबकि पेट्रोल के दाम में 0.50 पैसे कम हुए हैं। इसी तरह, केरोसिन के दाम में 3.53 रुपये की कटौती हुई है।

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अब क्या हुए दाम?

मौजूदा कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल के नई कीमत 255.63 रुपये प्रति लीटर हो गई है। इसी तरह, हाई-स्पीड डीजल अब 258.64 रुपये प्रति लीटर और केरोसिन 168.12 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम पहले से ही बहुत ज्यादा हैं, लिहाजा उसके मुकाबले कटौती ज्यादा बड़ी नहीं है लेकिन फिर भी रमजान से ठीक पहले जनता को कुछ राहत जरूर मिली है।

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तब खूब बढ़े थे दाम

भारत की बात करें, तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का फायदा जनता को नहीं मिल रहा है। जबकि पहले जब अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में क्रूड ऑयल महंगा हो रहा था, तो कंपनियों ने उसका हवाला देकर जमकर कीमतों में इजाफा किया था। लेकिन कच्चा तेल सस्ता होने का फायदा कंपनियां जनता को देने में मूड में दिखाई नहीं दे रही हैं। कई बार ऐसी खबरें आईं हैं कि पेट्रोल सस्ता हो सकता है, मगर ऐसा अब तक हुआ नहीं है।

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क्या है क्रूड का दाम?

कच्चे तेल की कीमतें बीते कुछ समय से नरम बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड का दाम 28 फरवरी को 73.20 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। इस साल अब तक यानी 1 जनवरी से लेकर 28 फरवरी तक इसमें 3.60% की गिरावट आई है। कच्चे तेल के सस्ता होने से कंपनियों की लागत में कमी आती है, जिसका फायदा वह जनता को पहुंचा सकती हैं। लेकिन भारतीय कंपनियों ने ऐसी इच्छा अब तक दर्शाई नहीं है।

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