आज 1 अप्रैल 2026 से देश के श्रम कानूनों में सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने दशकों पुराने 44 श्रम कानूनों को समेटकर 4 नए लेबर कोड (New Labour Codes) लागू कर दिए हैं। यह बदलाव न केवल कंपनियों के काम करने के तरीके को बदलेगा, बल्कि आपकी सैलरी स्लिप, वर्किंग ऑवर्स और रिटायरमेंट की पूरी प्लानिंग को री-सेट कर देगा। आइये समझते हैं कि नया लेबर कोड आपको कैसे प्रभावित कर सकता है ?
नया लेबर कोड आने से क्या बदलेगा?
यह बदलाव ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ ईज ऑफ लिविंग पर आधारित है। अब पूरे देश में नियम एक समान (Uniform) होंगे और सब कुछ डिजिटल व पारदर्शी होगा।
इन-हैंड सैलरी (Take-home Pay) पर असर
नए लेबर कोड के आने से इन हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है। नियम के अनुसार, बेसिक वेतन कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% होना चाहिए। बेसिक बढ़ने से पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी में आपका योगदान बढ़ेगा, जिससे महीने में हाथ में आने वाला पैसा थोड़ा कम होगा, लेकिन भविष्य की बचत (Retirement Fund) बहुत मजबूत हो जाएगी।
क्या अब हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करना होगा?
नए कोड में हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम का नियम है। अगर कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट रखती है, तो आपको 4 दिन काम और 3 दिन की छुट्टी मिलेगी। अगर 8 घंटे की शिफ्ट है, तो 6 दिन काम करना होगा। यह एम्प्लॉयर और एम्प्लॉई के एग्रीमेंट पर निर्भर करेगा।
ओवरटाइम (Overtime) और बची हुई लीव के लिए क्या एक्स्ट्रा पैसे मिलेंगे?
बिल्कुल। तय घंटों से ज्यादा काम करने पर कंपनी को सामान्य मजदूरी से दोगुना (Double) भुगतान करना होगा। वहीं बची हुई छुट्टियों (Leaves) के मामले में नए लेबर कोड का नियम कहता है कि अब साल के अंत में एक सीमा से ऊपर की बची हुई छुट्टियों का पैसा (Encashment) देना कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। आपकी मेहनत की छुट्टियां अब बेकार नहीं जाएंगी।
पीएफ (PF) योगदान में क्या विकल्प मिलेंगे?
युवा कर्मचारी 15,000 रुपये की न्यूनतम सीमा पर योगदान का विकल्प चुन सकते हैं ताकि हाथ में ज्यादा पैसा आए। वहीं, बड़ी उम्र के कर्मचारी पूरी बेसिक पर योगदान देकर बड़ा रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।
क्या 1 साल की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी?
सामान्य कर्मचारियों के लिए नियम वही है, लेकिन फिक्स्ड टर्म कॉन्ट्रैक्ट (FTC) वालों के लिए बड़ी राहत है। अब वे 1 साल का कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने पर भी ग्रेच्युटी के हकदार होंगे।
जोमैटो-स्विगी जैसे गिग वर्कर्स और महिलाओं की नाइट शिफ्ट के लिए इसमें क्या है?
पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को कानून के दायरे में लाया गया है। उनके लिए सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा, जिससे उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। महिलाएं अब अपनी मर्जी से नाइट शिफ्ट कर सकती हैं। हालांकि, कंपनी को उनकी सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और लाइटिंग के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
हेल्थ इंश्योरेंस (ESIC) में क्या बदलाव है?
ईएसआईसी की सैलरी लिमिट 21,000 से बढ़ाकर 30,000 की जा सकती है, जिससे एक बड़ी आबादी को फ्री मेडिकल सुविधा मिल सकेगी।
नए लेबर कोड से कर्मचारियों को फायदा होगा। खासतौर से गिग वर्कर्स को पहचान और मजबूत रिटायरमेंट फंड मिलेगा। हालांकि कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों की मंथली इन हैंड सैलरी में थोड़ी गिरावट आएगी।
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