भारत के दिग्गज कारोबारी और मुकेश अंबानी के समधी अजय पिरामल ने अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बड़ा वित्तीय फैसला लिया है. पिरामल ग्रुप अपनी वित्तीय शाखा ‘पिरामल फाइनेंस’ के जरिए विदेशी बाजारों से 1 अरब डॉलर यानी करीब 9400 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज जुटाने की तैयारी में है. यह भारी-भरकम राशि विदेशी बैंकों और बहुपक्षीय एजेंसियों से विदेशी मुद्रा ऋण के रूप में ली जाएगी. कंपनी के सीईओ जयराम श्रीधरन के मुताबिक इस कर्ज की अवधि तीन से पांच साल के बीच होगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय बाजार में रिटेल लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है और पिरामल ग्रुप इस मौके को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
घरेलू कंज्यूमर लोन मार्केट पर कब्जा करने की तैयारी
पिरामल फाइनेंस इस विदेशी कर्ज का इस्तेमाल मुख्य रूप से अपने घरेलू कंज्यूमर लोन पोर्टफोलियो को विस्तार देने के लिए करेगा. कंपनी का मानना है कि भारत के रिटेल और माइक्रो बिजनेस सेक्टर में लोगों की बढ़ती आकांक्षाएं विकास के बड़े अवसर पैदा कर रही हैं. खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक बैंकों की पहुंच कम है या उनके नियम ज्यादा सख्त हैं, वहां पिरामल फाइनेंस अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. हालांकि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर है जिससे हेजिंग की लागत बढ़ गई है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी को उम्मीद है कि विदेशी बाजार से कम ब्याज दरों पर मिलने वाला यह पैसा उनके बिजनेस को तेजी से आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा.
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भारतीय कंपनियों का विदेशी कर्ज की ओर बढ़ता रुझान
आजकल कई बड़ी भारतीय कंपनियां कम ब्याज दरों और लंबी अवधि के फायदों के चलते विदेशी बाजारों से कर्ज लेना पसंद कर रही हैं. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े भी इसी ओर इशारा करते हैं कि स्थानीय कंपनियों का बाहरी कमर्शियल लोन (ECB) पिछले एक साल में काफी बढ़ा है. फरवरी के आंकड़ों के अनुसार यह राशि 2.82 अरब डॉलर से बढ़कर 4.63 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. पिरामल ग्रुप भी इसी रणनीति पर चलते हुए उधारदाताओं के एक बड़े नेटवर्क का लाभ उठाना चाहता है. विदेशी मुद्रा में मिलने वाला यह ऋण कंपनी को न केवल वित्तीय मजबूती देगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी साख को भी और अधिक मजबूत बनाएगा.
एनबीएफसी सेक्टर में पिरामल फाइनेंस का दबदबा
पिरामल फाइनेंस वर्तमान में भारत की सबसे तेजी से बढ़ती नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) में से एक बन चुकी है. कंपनी मॉर्गेज, प्रॉपर्टी लोन और पुरानी कारों के लिए लोन जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान कर रही है. पिछले पांच वर्षों में कंपनी की कुल संपत्ति यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट दोगुना होकर 1 ट्रिलियन रुपये (लगभग 10.5 बिलियन डॉलर) तक पहुंच गया है. प्रबंधन का लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों में इसमें 50 प्रतिशत की और बढ़ोतरी की जाए. 9400 करोड़ रुपये का यह नया निवेश न केवल कंपनी के टर्नओवर को बढ़ाएगा बल्कि भारतीय रिटेल मार्केट में उनकी हिस्सेदारी को भी कई गुना बढ़ा देगा, जिससे प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के बीच हलचल मचनी तय है.
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