अगर आप भी बिजनेसमैन, डॉक्टर, वकील, फ्रीलांसर या शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने वाले शख्स हैं और अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-3 या ITR-4) फाइल नहीं किया है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त बिल्कुल नजदीक है. इस काम के लिए आपके पास सिर्फ दो ही दिन बचे हैं.
इस बार टैक्स डिपार्टमेंट के नियम थोड़े सख्त हैं और अगर आपके आंकड़ों में जरा सी भी गड़बड़ी हुई, तो सीधा इनकम टैक्स का नोटिस घर पहुंच सकता है. आइए जानते हैं कि वे 10 अहम नियम, जिन्हें ITR भरते समय ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
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इन 10 बातों का रखें ख्याल
P&L और बैलेंस शीट का सही मिलान
अगर आप ITR-3 भर रहे हैं, तो अपने टर्नओवर, खर्चों, एसेट्स और देनदारियों का पूरा हिसाब अपनी किताबों के हिसाब से बिल्कुल सटीक दर्ज करें.
Schedule BP में टैक्स योग्य कमाई
अपने पर्सनल खर्चों और बिना चुकाए गए सरकारी बकाए को जोड़कर ही सही टैक्सेबल बिजनेस इनकम निकालें, इसे शेड्यूल बीपी में जरूर दिखाएं.
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कैपिटल गेन
प्रॉपर्टी, शेयर या म्यूचुअल फंड बेचने पर जो भी मुनाफा या नुकसान हुआ है, उसकी सही जानकारी Schedule CG और 112A में भरें.
क्रिप्टो और डिजिटल एसेट्स
अगर आपने क्रिप्टोकरेंसी या वर्चुअल डिजिटल एसेट्स में निवेश किया है और उससे कमाई हुई है, तो उसकी खरीद-फरोख्त की तारीख के साथ अलग से जानकारी दें.
अन्य स्रोतों से कमाई
बैंक खाते के ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), डिविडेंड और पुराने टैक्स रिफंड पर मिले ब्याज को इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में जोड़ना न भूलें.
नुकसान आगे ले जाने के नियम
अगर बिजनेस या शेयर बाजार में नुकसान हुआ है, तो उसे अगले 8 सालों तक एडजस्ट करने के लिए CYLA, BFLA और CFL के कॉलम सही से भरें.
ITR-4 में प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन की सीमा
सेक्शन 44AD के तहत डिजिटल टर्नओवर पर कम से कम 6% और बाकी पर 8% मुनाफा दिखाना जरूरी है. वहीं प्रोफेशनल्स (Section 44ADA) को कुल फीस का कम से कम 50% प्रॉफिट बताना होता है.
दो मकानों की प्रॉपर्टी का नया नियम
इस साल से ITR-4 में दो घरों की डिटेल्स देने की सुविधा मिल गई है, जिसमें अनरियलाइज्ड रेंट (बकाया किराया) के लिए एक नया कॉलम भी जोड़ा गया है.
F&O और इंट्राडे ट्रेडिंग की अलग रिपोर्टिंग
शेयर मार्केट में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) और इंट्राडे ट्रेडिंग करने वालों के लिए टर्नओवर और प्रॉफिट को अलग-अलग शेड्यूल में दिखाना इस बार अनिवार्य कर दिया गया है.
26AS, AIS और GST का मिलान
रिटर्न सबमिट करने से पहले अपने फॉर्म 26AS, AIS, TIS और बैंक स्टेटमेंट के आंकड़ों का मिलान अपने जीएसटी रिटर्न से जरूर कर लें.
इन नियमों को फॉलो करने के क्या फायदे हैं?
पेनल्टी से बचाव: 31 अगस्त तक सही रिटर्न भरने से 5000 रुपये की लेट फीस और 1% महीने के ब्याज (Section 234A) से राहत मिलती है.
लोन मिलने में आसानी: पारदर्शी और सही रिटर्न होने पर बैंक आसानी से बिजनेस लोन और क्रेडिट कार्ड अप्रूव कर देते हैं.
नोटिस से सुरक्षा: 26AS और AIS का मिलान पहले ही कर लेने से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का ऑटोमेटेड सिस्टम आपको डेटा मिसमैच का नोटिस नहीं भेजेगा.
समय रहते अपना ITR फाइल करें और ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) की प्रक्रिया पूरी करके बेफिक्र हो जाएं.