ईरान में गहराते आर्थिक और राजनीतिक संकट का सीधा असर अब भारतीय व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है. जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की मुद्रा ‘रियाल’ में भारी गिरावट और अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने के कारण भारतीय निर्यातकों का हजारों करोड़ रुपया अधर में लटक गया है. दरअसल, ईरान भारत से हर साल लगभग 10 लाख मीट्रिक टन चावल का आयात करता है. लेकिन मौजूदा हालात में यह पूरा कारोबार लगभग ठप हो गया है. राइस एक्सपोर्टर सोबित जैन के अनुसार भुगतान अटका हुआ है और सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो चुकी है. सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान और इस्तांबुल की ओर जाने वाली सप्लाई पर भी ब्रेक लग गया है. कई व्यापारियों का कहना है कि न तो मर्चेंट्स से संपर्क हो पा रहा है और न ही पेमेंट को लेकर कोई स्पष्टता है. स्थिति यह है कि कई शिपमेंट्स अभी भी बंदरगाहों पर ही फंसी हुई हैं, जिन्हें आगे भेजना या वापस मंगाना, दोनों ही फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा है.
वहीं दूसरी ओर, ईरान और अफगानिस्तान से भारत आने वाला ड्राई फ्रूट्स का आयात भी रुक गया है. इसके चलते आने वाले दिनों में देश के ड्राई फ्रूट्स बाजार में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है. ड्राईफ्रूट आयातक मोहित गोयल के अनुसार कुल मिलाकर, ईरान के बिगड़ते हालात ने भारतीय एक्सपोर्टर्स की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. व्यापारियों को अब बस इसी बात की उम्मीद है कि हालात जल्द शांत हों और एक बार फिर कारोबार की टूटी कड़ी जुड़ सके.
भारत पर कितना पड़ने वाला है प्रभाव:
बासमती निर्यातकों का कई करोड़ फंसा: ईरान भारतीय बासमती चावल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है. सालाना करीब 12000 करोड़ का व्यापार.
शिपमेंट पर ब्रेक: ईरान सरकार द्वारा खाद्य आयात पर दी जाने वाली सब्सिडी (Subsidies) खत्म करने और मुद्रा संकट के कारण भारतीय निर्यातकों ने फिलहाल शिपमेंट रोक दी है.
फंसा हुआ माल: लगभग 2000 करोड़ मूल्य के बासमती चावल की खेप वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर अटकी हुई है, जिन्हें क्लीयरेंस नहीं मिल पा रहा है.
भुगतान का संकट (Payment Default Risk)
मुद्रा का गिरना: ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर (लगभग 150000 रियाल प्रति डॉलर) पर पहुंच गया है. इससे ईरानी आयातकों के लिए भारतीय माल खरीदना बहुत महंगा हो गया है.
बकाया राशि: पंजाब और हरियाणा के चावल मिलर्स और निर्यातकों का पिछला भुगतान भी अटकने की कगार पर है क्योंकि ईरान के पास विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Reserve) की भारी कमी हो गई है.
चाबहार बंदरगाह और INSTC पर असर
भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) में भारी निवेश किया है. ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और अस्थिरता के कारण इन सामरिक परियोजनाओं का काम धीमा हो सकता है. अगर स्थिति बिगड़ती है, तो मध्य एशिया और रूस तक माल भेजने का भारत का वैकल्पिक रास्ता प्रभावित होगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ जाएगी.
किन उत्पादों पर पड़ेगा असर?
ईरान को भारत मुख्य रूप से नीचे दिए गए सामान भेजता है, जिनका निर्यात अब खतरे में है:
- चावल (विशेषकर बासमती)
- चाय और चीनी
- दवाइयां (Medicines)
- इलेक्ट्रिकल मशीनरी और कृत्रिम फाइबर
भारत के लिए चुनौती
भारत अब तक ईरान के टॉप 5 व्यापारिक साझेदारों में शामिल रहा है. 2024-25 में भारत का व्यापार सरप्लस ईरान के साथ करीब $0.80 बिलियन था. लेकिन अब संकट के कारण:
किसानों को नुकसान: पंजाब और हरियाणा की मंडियों में धान (बासमती) के भाव 300-400 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर सकते हैं.
व्यापार घाटा: निर्यात रुकने से भारत के कुल व्यापार लक्ष्यों (Export Targets) को झटका लग सकता है.