ITR Rules for Housewife: अक्सर यह माना जाता है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) सिर्फ नौकरीपेशा या बिजनेस करने वाले लोगों के लिए ही जरूरी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक होममेकर (गृहिणी) को भी ITR दाखिल करना पड़ सकता है? भले ही उनके पास कोई नियमित सैलरी न आती हो, लेकिन अगर उनकी कमाई अलग-अलग जरियों से तय सीमा से अधिक है, तो रिटर्न भरना अनिवार्य हो जाता है.
आइए समझते हैं कि एक गृहिणी या हाउस मेकर के लिए टैक्स के क्या नियम हैं, आय के साधन क्या हैं और टैक्स कैसे बचाया जा सकता है.
क्या गृहिणी के लिए ITR दाखिल करना जरूरी है?
जाने माने चार्टर्ड अकाउंटेंट नारायण कुमार झा ने बताया कि आयकर कानून के मुताबिक, अगर किसी भी व्यक्ति की सालाना आय (Annual Income) छूट सीमा (Exemption Limit) से अधिक है, तो उसे टैक्स रिटर्न भरना होता है. न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में सालाना 4 लाख रुपये तक की कमाई पर शून्य (Nil) टैक्स है. जबकि ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) में 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों के लिए बेसिक छूट सीमा 2.5 लाख रुपये है. अगर किसी गृहिणी की कुल सालाना आय इन सीमाओं से अधिक है, तो उन्हें ITR दाखिल करना होगा.
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कहां से होती है गृहिणियों की कमाई
घर चलाने के लिए पति से मिलने वाला घरेलू खर्च (Household Allowance) को पत्नी की कमाई नहीं माना जाता. इस पर कोई टैक्स नहीं लगता. लेकिन अगर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग्स अकाउंट से ब्याज मिलता है, तो वह टैक्स के दायरे में आता है. इसके अलावा अगर पति अपने पैसों से पत्नी के नाम पर प्रॉपर्टी या एफडी कराते हैं, तो उससे होने वाली आय पर टैक्स नियमों के तहत गणना होती है.
रिश्तेदारों से मिलने वाले गिफ्ट टैक्स-फ्री होते हैं. लेकिन गैर-रिश्तेदारों से 50000 रुपये से अधिक के गिफ्ट मिलने पर टैक्स लगता है. उसी तरह संपत्ति से मिलने वाला किराया या शेयर बाजार/म्यूचुअल फंड से मिलने वाला रिटर्न भी टैक्सेबल होता है.
टैक्स में छूट और कटौती
गृहिणियां भी आयकर कानून के तहत मिलने वाली छूट का लाभ उठा सकती हैं. जैसे कि Section 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस के प्रीमियम पर डिडक्शन का लाभ उठा सकती हैं. इसके अलावा Section 80TTA/80TTB के तहत 60 साल से कम उम्र के लिए बचत खाते के 10,000 रुपये तक के ब्याज पर छूट पा सकती हैं. वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 50000 रुपये है.
Section 10(15)(i) के तहत पोस्ट ऑफिस सिंगल अकाउंट में 3500 रुपये और जॉइंट अकाउंट में 7000 रुपये तक का ब्याज टैक्स-फ्री है.
इनकम टैक्स स्लैब (वित्त वर्ष 2026-27)
न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime – 60 वर्ष से कम):
4 लाख तक: कोई टैक्स नहीं (Nil)
4 लाख से 8 लाख: 5%
8 लाख से 12 लाख: 10%
12 लाख से 16 लाख: 15%
16 लाख से 20 लाख: 20%
20 लाख से 24 लाख: 25%
24 लाख से अधिक: 30%
ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime – 60 वर्ष से कम):
2.5 लाख तक: कोई टैक्स नहीं (Nil)
2.5 लाख से 5 लाख: 5%
5 लाख से 10 लाख: 20%
10 लाख से अधिक: 30%
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