सरकारी नौकरी का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में सुरक्षा और सैलरी का ख्याल आता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि एक सफाई कर्मचारी का मासिक वेतन किसी बड़े कॉरपोरेट मैनेजर या पायलट से भी ज्यादा हो सकता है? सुनने में यह किसी फिल्मी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन तेलंगाना से आई एक ताजा रिपोर्ट ने सबको हैरान कर दिया है. जी हां, यहां बिजली विभाग के कुछ सफाई कर्मचारियों की सैलरी 2 लाख रुपये महीना तक पहुंच गई है.
आमतौर पर माना जाता है कि सरकारी विभागों में सबसे ज्यादा वेतन टॉप ब्यूरोक्रेट्स या आईएएस (IAS) अधिकारियों का होता है. लेकिन तेलंगाना के पावर सेक्टर (Power Sector) में कहानी कुछ और ही है. यहां का सैलरी स्ट्रक्चर अब चर्चा का विषय बन गया है. आइए जानते हैं क्या है इस भारी-भरकम सैलरी के पीछे का पूरा गणित क्या है…
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चीफ सेक्रेटरी का खुलासा: बजट में 300% का उछाल
तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव ने हाल ही में एक सम्मेलन में राज्य के वित्तीय हालात पर डेटा शेयर किया है. उन्होंने बताया कि 2014 में जब तेलंगाना अलग राज्य बना था, तब वेतन और पेंशन पर मासिक खर्च 1500 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 6000 करोड़ रुपये हो गया है. यानी पिछले 10 साल में सीधा 300% का इजाफा!
बिजली विभाग में सैलरी का सैलाब
हैरानी की बात तब सामने आई जब मुख्य सचिव ने विभागों के अंदरूनी सैलरी स्ट्रक्चर का जिक्र किया. राज्य की बिजली कंपनियों में मुख्य इंजीनियरों का वेतन 7 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच गया है. सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि पावर सेक्टर में काम करने वाले सीनियर फोर्थ ग्रेड कर्मचारी, जिनमें सफाईकर्मी भी शामिल हैं, अब लगभग 2 लाख रुपये प्रति माह का वेतन उठा रहे हैं.
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आखिर इतनी सैलरी क्यों?
मुख्य सचिव राव ने इसके पीछे की दो बड़ी वजहें बताई हैं:
- वेतन संशोधन चक्र (Salary Revision Cycle): सामान्य सरकारी विभागों में वेतन संशोधन एक तय अंतराल पर होता है, लेकिन बिजली कंपनियों में हर चार साल में सैलरी रिवीजन का नियम है. बार-बार होने वाले इस रिवीजन ने वेतन को इस स्तर पर पहुंचा दिया है.
- चुनाव और राजनीति: रिपोर्ट के अनुसार, समय-समय पर हुए चुनावों के दौरान किए गए वेतन संशोधनों ने भी इस आंकड़े को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
नगर निगम का हाल: पुराने ड्राइवरों की भी चांदी
सिर्फ बिजली विभाग ही नहीं, अन्य विभागों में भी पुराने कर्मचारियों का जलवा है. जैसे कि सीनियर ड्राइवर्स और सफाईकर्मी की सैलरी में भी इजाफा हुआ है. तीन दशक (30 साल) से ज्यादा सेवा दे चुके अनुभवी ड्राइवर और सफाई कर्मचारी भी 1 लाख रुपये से अधिक का वेतन पा रहे हैं. ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) में नियमित किए गए सफाई कर्मचारियों को भत्तों के साथ औसतन 70000 महीना मिलता है.
बजट पर बढ़ता बोझ
जहां एक ओर कर्मचारी इस भारी वेतन से खुश हैं, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राज्य के खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है. जब सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों का वेतन संवैधानिक प्रमुखों (जैसे राज्यपाल) और शीर्ष नौकरशाहों से भी ज्यादा हो जाता है, तो यह प्रशासनिक और वित्तीय संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है.