जब आप अपनी गाड़ी में पेट्रोल भरवाते हैं, तो क्या आपने ध्यान दिया है कि भारत कितनी तेजी से इथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) की ओर बढ़ रहा है? भारत इंडिपेंडेंट इथेनॉल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIEPA) के अध्यक्ष पुष्पिंदर सिंह (Pushpinder Singh) ने News 24 (ह‍िन्‍दी) के साथ एक खास बातचीत की. इस इंटरव्यू में उन्होंने भारत में फ्यूल के भविष्य, इथेनॉल के उत्पादन और गाड़ियों पर पड़ने वाले असर को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं.

आइए, समझते हैं कि अगले 5 सालों में भारत का फ्यूल गेम कैसे बदलने वाला है.

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E20 के बाद क्या E30 की बारी है?

वर्तमान में देश में E20 पेट्रोल (यानी 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण) को तेजी से लागू किया जा रहा है.पुष्पिंदर सिंह के अनुसार, आने वाले 5 सालों में E20 की जगह धीरे-धीरे E30 ले लेगा. यानी आपके पेट्रोल में 30% तक इथेनॉल मिलाया जाएगा. इससे न सिर्फ देश का तेल आयात बिल (Import Bill) कम होगा, बल्कि पर्यावरण को भी भारी फायदा पहुंचेगा.

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सड़कों पर दौड़ेंगी फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) गाड़ियां
E20 और E30 के साथ-साथ देश में फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ने वाला है. फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में 85% तक इथेनॉल वाले पेट्रोल (E85) का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकेगा. ऑटोमोबाइल कंपनियां अब ऐसे इंजन तैयार कर रही हैं जो ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन पर बिना किसी खराबी के स्मूथ चल सकें.

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भारत बनेगा इथेनॉल का एक्सपोर्ट हब
भारत में इथेनॉल का उत्पादन इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि आने वाले समय में हम अपनी जरूरतें पूरी करने के बाद इसे दूसरे देशों को बेचने की स्थिति में होंगे. भारत मुख्यतः अपने पड़ोसी और साउथ-ईस्ट एशियाई देशों जैसे नेपाल, बांग्लादेश और भूटान को इथेनॉल एक्सपोर्ट करने की योजना बना रहा है. इससे देश की विदेशी मुद्रा में भी बढ़ोतरी होगी.

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इथेनॉल प्लांट से खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
इथेनॉल सिर्फ गाड़ियों का ईंधन नहीं बदल रहा, बल्कि ग्रामीण और शहरी भारत में नौकरियों की बौछार भी ला रहा है. पुष्पिंदर सिंह ने बताया कि अगर एक छोटा इथेनॉल प्लांट या फैक्ट्री भी लगती है, तो उससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष (Direct & Indirect) रूप से लगभग 800 लोगों को रोजगार मिलता है.

इसके अलावा मक्का, गन्‍ना और अन्य कृषि अवशेषों से इथेनॉल बनने के कारण किसानों की आय में भी सीधा इजाफा हो रहा है.

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E20 से E30 की तरफ बढ़ना और फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों को अपनाना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Energy Independence) की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. अगले 5 सालों में भारत न केवल ईंधन के मामले में अधिक मजबूत होगा, बल्कि इथेनॉल का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरेगा.