1977 में धीरुभाई से लेकर 2026 में ईशा-आकाश-अनंत तक: रिलायंस के आईपीओ और 50 साल की विरासत की पूरी कहानी

धीरूभाई अंबानी ने जब Reliance Industries को पब्लिक मार्केट में उतारा था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि ये एक छोटा सा टेक्सटाइल बिजनेस एक दिन भारत की सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगा. 1977 का वो IPO आम आदमी के लिए था, धीरूभाई चाहते थे कि हर भारतीय रिलायंस का मालिक बने. 2026 – इतिहास खुद को दोहरा रहा है.

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1977 में धीरुभाई अंबानी के पहले आईपीओ से लेकर 2026 में ईशा और आकाश अंबानी के जियो मेगा आईपीओ तक, जानिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की 50 साल की ऐतिहासिक विरासत और सफलता की पूरी कहानी.

साल 1977 में धीरुभाई अंबानी द्वारा पहली बार रिलायंस इंडस्ट्रीज को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (List) कराने से लेकर 2026 में ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी के नेतृत्व में जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के मेगा आईपीओ की तैयारी तक, यह सिर्फ एक बिजनेस ग्रोथ की कहानी नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक आजादी और पीढ़ियों की दूरदर्शिता (Legacy Across Generations) की महागाथा है.

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1977 का वो ऐतिहासिक कदम: धीरुभाई अंबानी और पहला IPO

1977 में जब धीरुभाई अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज का पहला आईपीओ बाजार में उतारा, तब भारत में शेयर बाजार का दायरा बहुत सीमित था. धीरुभाई ने देश के आम मध्यमवर्गीय परिवारों, शिक्षकों और छोटे दुकानदारों को अपनी कंपनी का शेयरहोल्डर (Stakeholder) बनने का मौका दिया. उस दौर में जिन साधारण परिवारों ने रिलायंस के शेयरों पर भरोसा जताया, उनके छोटे-छोटे निवेश आगे चलकर बहुत बड़ी संपत्ति में बदल गए.

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2026 का नया इतिहास: अगली पीढ़ी के हाथ में कमान
लगभग 50 साल बाद, आज जब रिलायंस की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) का 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का मेगा आईपीओ बाजार में आ रहा है, तब अंबानी परिवार की नई पीढ़ी (ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी) इस विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है.

डिजिटल क्रांति (Jio): आकाश और ईशा अंबानी के नेतृत्व में जियो ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सस्ता डेटा इस्तेमाल करने वाला देश बना दिया.

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रीटेल और ग्रीन एनर्जी: ईशा अंबानी ने रिलायंस रीटेल को देश का सबसे बड़ा रीटेल नेटवर्क बनाया, वहीं अनंत अंबानी ग्रीन एनर्जी और नए सेक्टर्स में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं.

1977 से 2026 तक की यह यात्रा यह साबित करती है कि जब कोई बिजनेस सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं और सहूलियतों को ध्यान में रखकर खड़ा किया जाता है, तो वह केवल एक कंपनी नहीं रह जाता—वह एक राष्ट्रीय विरासत (National Legacy) बन जाता है.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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