ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की आग एक बार फिर भड़क उठी है. अमरीका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध और लाल सागर (Red Sea) में हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतें पिछले 6 हफ्तों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 96 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है.
होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) और लाल सागर जैसे मुख्य समुद्री रास्तों पर मंडराते संकट ने दुनिया भर के तेल सप्लाई सिस्टम की नींदे उड़ा दी हैं. आइए, समझते हैं कि क्रूड में इस तेजी के पीछे कौन-कौन से कारण हैं और आने वाले दिनों में तेल की कीमतें कहां तक जा सकती हैं.
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कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के 4 मुख्य कारण
अमरीका और ईरान के बीच गहराया तनाव: अमरीकी सेना ने ईरान पर लगातार 12वीं रात भी एयरस्ट्राइक की है. जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उनके नियंत्रण में है और जब तक अमरीकी कार्रवाई बंद नहीं होती, यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा.
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सऊदी अरब की घेराबंदी और हूती हमले: यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है. लाल सागर में सऊदी अरब के ऑइल टैंकरों पर हमले की खबरों से वैश्विक बाजार घबराया हुआ है.
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सप्लाई चेन पर बड़ा खतरा: दुनिया का एक बड़ा हिस्सा जिस समुद्री रास्ते से तेल मंगाता है, वहां सुरक्षा जोखिम और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत काफी बढ़ गई है.
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अमेरिका में क्रूड इन्वेंट्री में बढ़ोतरी: हालांकि अमेरिका में पिछले हफ्ते कच्चे तेल का स्टॉक 20 लाख बैरल बढ़ा है, लेकिन भू-राजनीतिक (Geopolitical) चिंताओं के आगे यह खबर बेअसर साबित हुई.
क्या $100 पहुंचेगा ब्रेंट?
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक होर्मुज और लाल सागर में स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कच्चे तेल में तेजी का रुख बना रहेगा. अगर मुख्य सप्लाई रास्तों पर तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले सत्रों में ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल का आंकड़ा छू सकता है. अमेरिकी क्रूड $85 के ऊपर मजबूत बना हुआ है. ऊपर की तरफ इसके लिए $88-$88.5 अगला रेजिस्टेंस है, जबकि नीचे की तरफ $84-$84.5 मुख्य सपोर्ट लेवल है. ओवरऑल ट्रेंड जब तक पॉजिटिव बना हुआ है, तब तक भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए महंगाई का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है.