वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में शुरू हुई नई सैन्य झड़पों ने तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया है.
होर्मुज स्ट्रैट (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल की सप्लाई ठप होने की आशंका से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गया है. आइए समझते हैं कि मिडिल ईस्ट में क्या हो रहा है और इसका असर कच्चे तेल के दामों पर कैसे पड़ रहा है और क्या इसका असर भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतों पर भी होगा.
क्यों उछल रही हैं तेल की कीमतें?
ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी हमला:
अमेरिकी नौसेन ने बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में कार्रवाई करते हुए ईरान के तीन तेल टैंकरों सुएजमैक्स काइलो, स्टार्क I और डाउनी को निशाना बनाया, जिसमें से एक टैंकर ओमान की खाड़ी में डूब गया.
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ईरान का नया नो-गो जोन:
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों ने होर्मुज स्ट्रैट और फारस की खाड़ी के बाहर एक नया प्रतिबंधित क्षेत्र (Restricted Zone) घोषित करने की चेतावनी दी है.
सप्लाई में रुकावट का डर:
होर्मुज जलमार्ग से दुनिया भर का लाखों बैरल कच्चा तेल रोज गुजरता है. इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से जहाजों की आवाजाही ठप होने का खतरा मंडरा रहा है.
कच्चे तेल के ताजा आंकड़े और बाजार की स्थिति
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 0.8% की बढ़त के साथ $97 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. वहीं WTI क्रूड लगभग $92 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इस साल ब्रेंट क्रूड की कीमतों में अब तक लगभग 60% का उछाल आ चुका है. डीजल जैसे रिफाइंड प्रोडक्ट्स और भी महंगे हो गए हैं.
क्या भारत में पेट्रोल डीजल के दाम पर दिखेगा असर?
शेयर मार्केट और कमोडिटी एक्सपर्ट एके निगम के अनुसार, अभी तो बाजार ने केवल शुरुआती जोखिम को आंका है. अगर वास्तविक तेल आपूर्ति में लगातार रुकावट आती है, तो कच्चे तेल का $100 प्रति बैरल के पार जाना तय है. और अगर ऐसा होता है तो भारत भी इससे प्रभावित होगा. भारत में पेट्रोल डीजल की कीमत पर इसका असर होना निश्चित है.
अमेरिकी राजनीति और चुनाव पर असर
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने साफ किया है कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज स्ट्रैट में कॉमर्शियल जहाजों की सुरक्षा और ईरानी तेल निर्यात को रोकने के लिए अपनी मौजूदगी कम नहीं करेगी.
वहीं, अमेरिका में नवंबर के मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से पहले बढ़ती ऊर्जा कीमतों को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को जनता से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. सर्वेक्षणों के मुताबिक ईरान संघर्ष से निपटने के मामले में ट्रम्प प्रशासन को खराब रेटिंग मिल रही है.
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