पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश के विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) को संकट से उबारने के लिए एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विमान ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ₹10,000 करोड़ के जेट फ्यूल प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड (Jet Fuel Price Stabilisation Fund) को मंजूरी दे दी गई है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज इस बड़े फैसले का आधिकारिक ऐलान किया।
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क्यों पड़ी इस फंड की जरूरत? महज 2 महीने में 2.5 गुना बढ़े दाम
कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मिडिल ईस्ट में चल रहे सैन्य टकराव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। इसका सीधा असर विमान ईंधन यानी एटीएफ (ATF - Aviation Turbine Fuel) पर पड़ा है।
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मार्च 2026 में कीमत: 60.5 रुपये प्रति लीटर
मई 2026 में कीमत: 142 रुपये प्रति लीटर (महज दो महीनों में करीब 2.5 गुना की भारी बढ़ोतरी)
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क्योंकि किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल ऑपरेटिंग कॉस्ट (परिचालन लागत) में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ विमान ईंधन (ATF) का होता है, इसलिए इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने भारतीय एयरलाइंस और तेल कंपनियों (OMCs) की कमर तोड़ दी थी。 कई कंपनियों को अपनी उड़ानें तक कम करनी पड़ रही थीं।
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अब सरकार ने तय की लिमिट: ₹75.6 से ज्यादा नहीं होंगे दाम
घरेलू विमानन कंपनियों को इस भारी वित्तीय बोझ से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा सुरक्षा कवच दिया है। सरकार ने घरेलू उड़ानों (Domestic Operations) के लिए विमान ईंधन की कीमत को ₹75.6 प्रति लीटर पर कैप (अधिकतम सीमा तय) कर दिया है।
इसका मतलब यह है कि अगर बाजार में ईंधन की कीमत इससे ऊपर जाती है, तो सरकार इस ₹10,000 करोड़ के फंड का इस्तेमाल करके कीमतों को स्थिर रखेगी और कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं आने देगी।
इस बड़े फैसले से आम जनता और कंपनियों को क्या होगा फायदा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, सरकार के इस कदम से कई बड़े फायदे होने वाले हैं:
फ्लाइट टिकट के दाम नहीं बढ़ेंगे: वैश्विक स्तर पर ईंधन महंगा होने के बावजूद अब एयरलाइन कंपनियां हवाई किरायों में मनमानी बढ़ोतरी नहीं कर पाएंगी। इससे आम हवाई यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
उड़ानें नहीं होंगी बाधित: एयरलाइंस के ऑपरेशन्स सुचारू रूप से चलते रहेंगे और लागत बढ़ने के डर से उड़ानों के रद्द होने या कम होने का खतरा टल जाएगा।
भारतीय विमानन क्षेत्र को मजबूती: यह फंड भारतीय शेड्यूल्ड एयरलाइंस को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के दौर में भी स्थिरता प्रदान करेगा।