Budget Expectation 2026: नई टैक्स व्यवस्था अब ज्यादातर करदाताओं की पसंद बन चुकी है. इसमें लोग कुछ व्यावहारिक सुधार चाहते हैं, मध्यम आय वर्ग के लिए टैक्स स्लैब की सीमा थोड़ी बढ़े और महंगाई के असर को कम करने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़े. बड़े टैक्स कट की उम्मीद कम है; लोगों को चाहिए साफ-सुथरे नियम, कम झंझट और रिटर्न भरते समय कोई अचानक परेशानी न हो.
वित्तीय और टैक्स सलाहकार और सीए शरद कोहली के अनुसार डायरेक्ट टैक्स में भी सुधार की जरूरत है. कैपिटल गेन टैक्स के नियम आज उलझे हुए हैं, अलग-अलग होल्डिंग पीरियड और बदलती दरें निवेशकों को भ्रमित करती हैं. अगर इन्हें सरल और एकरूप बनाया जाए, तो लंबे समय के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है. साथ ही, फेसलेस ऑडिट की प्रक्रिया को और बेहतर करना और विवादों का जल्दी निपटारा करना जरूरी है, ताकि कोर्ट-कचहरी के चक्कर कम हों.
जीएसटी अब पूरी तरह लागू हो चुका है, इसलिए बड़े बदलाव नहीं, बल्कि छोटे सुधार अपेक्षित हैं, रिफंड जल्दी मिलें, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्याएं सुलझें जो कैश फ्लो को नुकसान पहुंचाती हैं और बार-बार दरों में बदलाव न हों. खासकर एमएसएमई और छोटे कारोबारियों को आसान कंप्लायंस और इनपुट टैक्स क्रेडिट के साफ नियमों से बड़ी राहत मिलेगी.
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़कें, फैक्ट्रियां, रोजगार पर बना रहेगा और साथ ही राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम किया जाएगा.
बाजारों को स्थिरता चाहिए: बड़े झटकों की बजाय छोटे, भरोसेमंद कदम
अगर यह बजट भरोसा बढ़ाने, टैक्स को सरल बनाने और नीतियों के बेहतर क्रियान्वयन पर ध्यान देता है, तो यह शोर-शराबे से नहीं, बल्कि अपनी सादगी और समझदारी से याद रखा जाएगा.