जैसे-जैसे यूनियन बजट नजदीक आ रहा है, भारत की इकॉनमी में टैक्सपेयर्स से लेकर अलग-अलग सेक्टर्स तक, सभी की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं. जहां टैक्सपेयर्स, खासकर मिडिल क्लास, को कुछ खास राहत की उम्मीद है. महंगाई से बढ़ने वाले रोजमर्रा के खर्चों को लेकर सरकार इस बजट में बड़े कदम उठा सकती है. ज्यादा टैक्स छूट, आसान कंप्लायंस और ऐसे इंसेंटिव की जारदार मांग है जो बिना किसी मुश्किल के लंबी अवधि की बचत को बढ़ावा दें. सैलरी पाने वाले लोगों और छोटे प्रोफेशनल्स के लिए, उम्मीद है कि बजट फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करेगा.
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इन उम्मीदों और कयासों के बीच बजट 2026 की घोषणाओं से पहले बाजार में क्या सस्ता होगा और क्या महंगा इसको लेकर काफी अनुमान लगाए जा रहे हैं. सरकार का मुख्य फोकस मेक इन इंडिया और आम आदमी की बचत पर हो सकता है.
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क्या सस्ता हो सकता है?
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स:
सरकार मोबाइल फोन के पुर्जों (जैसे कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और चार्जर) पर कस्टम ड्यूटी घटा सकती है. इससे भारत में बने स्मार्टफोन और टैबलेट सस्ते हो सकते हैं.
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सस्ते घर (Affordable Housing):
होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट (Section 24b) को 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जा सकता है, जिससे घर खरीदना सस्ता पड़ेगा.
दवाइयां और मेडिकल उपकरण:
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाओं और लाइफ-सेविंग मेडिकल डिवाइसेज पर ड्यूटी कम होने की उम्मीद है.
इलेक्ट्रिक वाहन (EV):
लिथियम-आयन बैटरी के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर टैक्स घट सकता है, जिससे इलेक्ट्रिक स्कूटर और कारें सस्ती हो सकती हैं.
हेल्थ इंश्योरेंस:
बीमा प्रीमियम पर लगने वाले GST (18%) को कम करने की जोरदार मांग है. अगर यह घटता है, तो आपकी पॉलिसी सस्ती हो जाएगी.
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क्या महंगा हो सकता है?
इंपोर्टेड लग्जरी आइटम:
विदेशी घड़ियां, प्रीमियम कारें और महंगे जूते-कपड़े महंगे हो सकते हैं क्योंकि सरकार स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए इन पर सीमा शुल्क (Customs Duty) बढ़ा सकती है.
तंबाकू और सिगरेट:
हर बार की तरह इस बार भी तंबाकू उत्पादों पर टैक्स (NCCD) बढ़ सकता है, जिससे सिगरेट और गुटखा महंगा होने की आशंका है.
विदेशी कॉस्मेटिक्स:
बाहर से आने वाले प्रीमियम ब्यूटी प्रोडक्ट्स और परफ्यूम्स पर टैक्स बढ़ाया जा सकता है.
आम आदमी की जेब पर सबसे बड़ा असर
समानों की कीमत के अलावा, आपकी खरीदने की शक्ति बढ़ने की उम्मीद है. क्योंकि 12 लाख की जगह 15 लाख रुपये तक की आय पर 'जीरो टैक्स' की चर्चा हो रही है. इसके अलावा स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 से बढ़ाकर 100,000 किया जा सकता है.
कुल मिलाकर बजट का झुकाव उन चीजों को सस्ता करने पर होगा जो भारत में बनती हैं जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड प्रोडक्ट्स, जबकि विदेशी सामान महंगे हो सकते हैं.