देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार बजट पेश किया है. साल 2026 के आम बजट में एक कदम डिजिटल दुनिया और क्रिएटर्स के लिए भी उठाया गया, जिसके बाद ये कहा जा रहा है कि छोटे-छोटे गांव और कस्बों से भी अब कंटेंट क्रिएटर निकलेंगे. MSME के लिए ये एक जरूरी कदम है और इससे दुनिया में भारत का डंका बजेगा. सरकार के इस कदम को आइये आसान भाषा में समझते हैं और जानते हैं कि MSME सेक्टर इसके बारे में क्या सोचता है :
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सरकार ने क्या लिया है फैसला ?
सरकार देश भर में करीब 15,500 'क्रिएटर हब' (Creator Hubs) बनाने जा रही है. इसका मतलब है कि अब सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों में रहने वाले टैलेंट को भी आगे बढ़ने का मौका और ट्रेनिंग मिलेगी. सरकार का यह फैसला भारत की डिजिटल दुनिया और क्रिएटर्स (Content Creators) के लिए एक बहुत बड़ा गेम-चेंजर साबित होने वाला है.
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बटनशिफ्ट के को-फाउंडर और CEO दीपांकर दास ने सरकार के इस फैसले को लेकर News24 को बताया कि अब तक हम सिर्फ टैलेंट की बातें करते थे, लेकिन अब IICT (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज) की मदद से असल में इंफ्रास्ट्रक्चर (लैब और स्टूडियो) तैयार किया जा रहा है. भारत अभी तक ज्यादातर दूसरे देशों के लिए 'बैक-एंड' यानी पीछे रहकर काम करता था. लेकिन इन लैब्स के आने से अब भारतीय क्रिएटर्स अपना खुद का ओरिजिनल कंटेंट बनाएंगे जो पूरी दुनिया में टक्कर देगा.
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दीपांकर दास ने कहा कि हालांकि ये बहुत अच्छी शुरुआत है, लेकिन एक चुनौती अभी भी बरकरार है. क्रिएटर्स के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का इस्तेमाल करना बहुत महंगा पड़ता है. लैब्स तो बन रही हैं, लेकिन AI टेक्नोलॉजी का खर्च क्रिएटर्स को खुद उठाना होगा. उम्मीद है कि अगली बार सरकार इस तरफ भी ध्यान देगी.
किन-किन शहरों या राज्यों में सबसे पहले खुलने वाले हैं ये 15500 हब ?
अभी तक के बजट विवरणों और IICT (Indian Institute of Creative Technologies) के रोडमैप के अनुसार, इन 15,500 हब को एक फेज्ड मैनर में खोला जाएगा. सरकार का लक्ष्य इसे टॉप-डाउन के बजाय बॉटम-अप रखना है. यहां जानिए ये हब सबसे पहले कहां और कैसे खुलेंगे:
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पहला चरण: इन 5 राज्यों पर विशेष ध्यान
सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उन राज्यों को चुना है जहां डिजिटल क्रिएटर इकॉनमी पहले से ही बढ़ रही है:
- उत्तर प्रदेश: यहां के 'वाराणसी' और 'नोएडा' को बड़े केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा.
- महाराष्ट्र: मुंबई के अलावा 'पुणे' और 'नागपुर' में टियर-2 हब खुलेंगे.
- कर्नाटक: बेंगलुरु को 'क्रिएटर कैपिटल' बनाने के लिए यहां सबसे अत्याधुनिक लैब्स होंगी.
- तमिलनाडु: चेन्नई और कोयंबटूर में क्षेत्रीय भाषा के क्रिएटर्स के लिए विशेष फोकस रहेगा.
- पश्चिम बंगाल: कोलकाता को पूर्वी भारत का मुख्य क्रिएटर हब बनाया जाएगा.
टियर-2 और टियर-3 शहरों की प्राथमिकता
यह योजना दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के लिए नहीं, बल्कि छोटे शहरों के लिए है. प्राथमिकता उन शहरों को मिलेगी जहां युवा शक्ति ज्यादा है. इंदौर, जयपुर, पटना, लखनऊ और गुवाहाटी जैसे शहरों में बड़े रीजनल सेंटर बनेंगे. इन शहरों के सरकारी कॉलेजों और आईटीआई (ITI) परिसरों का उपयोग इन लैब्स को बनाने के लिए किया जा सकता है.
एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स
सरकार ने 112 ऐसे पिछड़े जिलों की पहचान की है जहां टैलेंट तो है पर साधन नहीं. इन 15,500 हब का एक बड़ा हिस्सा इन जिलों में खुलेगा ताकि वहां के युवा अपने स्थानीय कल्चर और भाषा में वीडियो या कंटेंट बना सकें.
इन लैब्स में मिलेगा क्या?
- हाई-एंड वर्कस्टेशन: वीडियो एडिटिंग के लिए भारी ग्राफिक कार्ड वाले कंप्यूटर.
- स्टूडियो सेटअप: ग्रीन स्क्रीन, प्रोफेशनल लाइटिंग और साउंड रिकॉर्डिंग गियर.
- मेंटरशिप: IICT के एक्सपर्ट्स ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लास देंगे कि कंटेंट को वायरल कैसे करें और उससे पैसे कैसे कमाएं.
सरकार जल्द ही एक क्रिएटर इंडिया पोर्टल लॉन्च करेगी, जहां आप अपने क्षेत्र के नजदीकी हब के लिए रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे.