भारत 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को इसका आयोजन किया जा रहा है. ये सम्मेलन ब्रिक्स के सदस्य देशों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. इसमें तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश शामिल हैं. BRICS शब्द ब्राजील, रूस, इंडिया, चीन और साउथ अफ्रीका के शुरुआती अक्षरों से मिलकर बना है. पिछले कुछ सालों में ब्रिक्स के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे नए देश में भी शामिल हुए हैं. इसमें कुल 11 देश शामिल हो चुके हैं. ब्रिक्स दुनिया की करीब 45 प्रतिशत आबादी और 40% ग्लोबल GDP का अकेला हिस्सेदार है.
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ब्रिक्स की तीन बड़ी शक्तियां
ब्रिक्स की तीन सबसे बड़ी शक्तियां हैं- चीन, रूस और भारत. नई दिल्ली में होने जा रहे 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में इस बार क्रॉस बॉर्डर पेमेंट्स डिजिटल करेंसी (CBDC) का प्रस्ताव आने जा रहा है, जिससे पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है. इस दौरान डिजिटल पेमेंट सिस्टम यानी ब्रिक्स पे (BRICS Pay) को मंजूरी और CBDC के बीच लिंक करने की प्लानिंग पर भी बात हो सकती है. अमेरिका ने जो टैरिफ पॉलिसी लागू की है उसके जवाब में ब्रिक्स के सदस्यों की कोशिश है कि डॉलर पर निर्भरता कम हो सके.
भारत का क्या रुख है?
पिछली बैठकों में ब्रिक्स के सदस्यों ने BRICS करेंसी लाने का सुझाव दिया था. चीन, रूस और ईरान इसका समर्थन कर रहे हैं, लेकिन भारत डॉलर को पूरी तरह हटाने वाली किसी प्रस्ताव के पक्ष में नहीं है. भारत का कहना है कि सदस्य देशों के बीच लोकल करेंसी में व्यापार हो, डिजिटल पेमेंट पर फोकस रहे लेकिन एक अलग करेंसी बनाने की जरूरत नहीं है. भारत के लिए डिजिल पेमेंट सिस्टम BRICS Pay काफी खास है. अगर चीन, रूस या ब्राजील भारत से चीजें खरीदते हैं, तो वो सीधे अपनी करेंसी में पेमेंट कर सकते हैं. इस करेंसी के बदले भारतीय ट्रेडर्स को रुपये मिलेंगे और करेंसी बदलने का कोई खर्च नहीं आएगा. साथ ही पेमेंट भी तुरंत हो जाएगी.
क्या है ब्रिक्स पे?
ब्रिक्स पे एक डीसेंट्रलाइज्ड डिजिटल पेमेंट सिस्टम होगा, जिसे बनाने का काम ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल कर रहा है. इसका मकसद ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच अमेरिकी डॉलर और पश्चिमी प्रभुत्व वाले SWIFT नेटवर्क पर निर्भरता को कम करना है. ब्रिक्स पे के आने से भारत का UPI, ब्राजील का Pix, रूस का SPFS और चीन का CIPS जैसा डिजिटल पेमेंट नेटवर्क आपस में जुड़ जाएंगे. इस पेमेंट सिस्टम से ब्रिक्स के सदस्य बिना किसी परेशानी के व्यापार कर पाएंगे. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों में ट्रैवल करने जा रहे लोगों को भी आसानी होगी. वो फॉरेन करेंसी या इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड के बिना सिर्फ QR कोड स्कैन करके पेमेंट कर पाएंगे.
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