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8th Pay Commission: क्या है 2.0 फिटमेंट फैक्टर? जानिए इससे ग्रॉस सैलरी सचमुच में बढेगी या नहीं

What is 2.0 Fitment Factor: 8वें पे कमीशन के 2.0 फिटमेंट फैक्टर को लेकर इस वक्त काफी चर्चाएं हो रही है. काफी कर्मचारियों इस बात को लेकर अंदाजा लगा रहे हैं कि अगर इससे बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो क्या ग्रॉस सैलरी में भी इजाफा होगा?

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मुख्य बिंदु

  • 2.0 का फिटमेंट फैक्टर सिर्फ बेसिक पेको दोगुना करता है, न कि कुल सैलरी को.
  • ग्रॉस सैलरी में DA, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और दूसरे फायदे शामिल होते हैं.
  • नया वेतन आयोग लागू होने पर DA को जीरो पर रीसेट कर दिया जाता है.
  • 2.0 फिटमेंट फैक्टर के तहत अनुमानित ग्रॉस सैलरी में बढ़ोतरी लगभग 31% है.
  • सैलरी में फाइनल रिवीजन सरकार की मंजूर की गई सिफारिशों पर डिपेंड करेगा.

2.0 Fitment Factor In 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच चर्चा छेड़ दी है, खासकर 2.0 फिटमेंट फैक्टर की संभावना को लेकर. हालांकि ये मल्टीप्लायर कर्मचारी की बेसिक पे को दोगुना कर देगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ओवरऑल मंथली सैलरी भी दोगुनी हो जाएगी. ग्रॉस सैलरी का कैलकुलेशन कई फैक्टर (जैसे अलाउंस) को ध्यान में रखकर करके की जाती है, और इसलिए ये बेसिक पे की तुलना में अलग पेस से बढ़ती है.

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ग्रॉस सैलरी उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ती?

कर्मचारी की ग्रॉस सैलरी बेसिक पे, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और दूसरे बेनेफिट्स से मिलकर बनती है. जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तो रिविजन का नया साइकल शुरू करने से पहले डीए को आमतौर पर जीरो पर रीसेट कर दिया जाता है. HRA का कैलकुलेशन रिवाइज्ड बेसिक पे पर किया जाता है, जबकि ट्रांसपोर्ट और दूसरे भत्तों को अलग से जोड़ा जाता है. नतीजतन, ग्रॉस सैलरी में इजाफा आमतौर पर बेसिक पे में हाइक से कम होता है.

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के तहत सैलरी

मिसाल के तौर पर कैलकुलेशन से पता चलता है कि अगर 18,000 रुपये की बेसिक पे वाले लेवल 1 के कर्मचारी को 2.0 फिटमेंट फैक्टर मिलता है, तो अनुमानित ग्रॉस सैलरी 34,200 हजार से बढ़कर तकरीबन 44,640 रुपये हो सकती है, जो लगभग 31 फीसदी के इजाफे को दिखाती है. 2.38 फिटमेंट फैक्टर के तहत, अनुमानित ग्रॉस सैलरी 53,122 रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि 2.57 फैक्टर इसे तकरीबन 57,362 रुपये तक ले जा सकता है. हायर पे लेवल पर भी इसी तरह के रुझान की उम्मीद है, जिसमें परसेंटेज इनक्रीज बेसिक पे में इजाफे से काफी कम रहेगी.

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हायर पे लेवल पर क्या होगा?

56,100 रुपये की मौजूदा बेसिक पे और 1,06,590 रुपये की अनुमानित ग्रॉस सैलरी वाले लेवल 10 के कर्मचारी के लिए, 2.0 फिटमेंट फैक्टर ग्रॉस सैलरी को लगभग 1,39,128 रुपये तक बढ़ा सकता है. 2.38 मल्टीप्लायर के तहत अनुमान बढ़कर 1,65,562 रुपये हो जाता है, जबकि 2.57 फिटमेंट फैक्टर इसे लगभग 1,78,779 रुपये तक पहुंचा सकता है. ये आंकड़े सिर्फ मिसाल के लिए हैं और इनमें ट्रांसपोर्ट अलाउंस और कई दूसरे बेनेफिट्स शामिल नहीं हैं.

(AI Image)

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पिछले वेतन आयोगों से जरूरी सीख

पिछले वेतन आयोगों से पता चलता है कि ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब हमेशा ‘टेक-होम सैलरी’ (इन हैंड सैलरी) में उतनी ही बढ़ोतरी नहीं होती है. 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर इस्तेमाल किया गया था, फिर भी ग्रॉस सैलरी में असल बढ़ोतरी उससे काफी कम थी. इसी तरह, छठे वेतन आयोग के तहत भी सैलरी में बदलाव अलग-अलग थे क्योंकि भत्तों (अलाउंस) को अलग से रीस्ट्रक्चर किया गया था. चूंकि सरकार ने अभी तक 8वें वेतन आयोग के लिए फाइनल फिटमेंट फैक्टर या रिवाइज्ड पे-मैट्रिक्स का ऐलान नहीं किया है, इसलिए कर्मचारियों को मौजूदा अनुमानों को फाइनल के बजाय सिर्फ इशारे के तौर पर देखना चाहिए.

निष्कर्ष

उम्मीद है कि 8वें वेतन आयोग से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में बदलाव होगा, लेकिन ज्यादा फिटमेंट फैक्टर को मासिक कमाई के सीधे दोगुना होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. चूँकि ग्रॉस सैलरी कई तरह के भत्तों और संशोधित वेतन संरचनाओं पर निर्भर करती है, इसलिए फाइनल बढ़ोतरी बेसिक पे में हुई बढ़ोतरी से काफी अलग हो सकती है. कर्मचारियों को सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि फाइनल फिटमेंट फैक्टर, पे-मैट्रिक्स और भत्तों की संरचना ही असल सैलरी बदलाव तय करेगी.

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Frequently Asked Questions

नहीं, ये बेसिक पे को दोगुना करता है, लेकिन रिवाइज्ड अलाउंस के कारण ग्रॉस सैलरी में बढ़ोतरी का प्रतिशत कम होता है.
क्योंकि DA को जीरो पर रीसेट कर दिया जाता है और HRA और ट्रांसपोर्ट अलाउंस जैसे भत्तों का कैलकुलेशन अलग से किया जाता है.
नहीं, फाइनल फिटमेंट फैक्टर और रिवाइज्ड पे स्ट्रक्चर की आधिकारिक ऐलान अभी तक नहीं की गई है.
नहीं, सैलरी में बदलाव पे-लेवल, पोस्टिंग वाले शहर, HRA कैटेगरी और लागू होने वाले भत्तों के आधार पर अलग-अलग होंगे.
नहीं, ये सिर्फ अनुमानित फिटमेंट फैक्टर पर बेस्ड मिसाल हैं, न कि सरकार के आधिकारिक आंकड़े.
First published on: Jul 22, 2026 05:06 PM

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About the Author

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 के डिजिटल सेक्शन में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. उन्हें नेशनल, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स ट्रैवल, टेक, हेल्थ, लाइफस्टाइल और रिलेशनशिप सेक्शन का बेहतरीन तजुर्बा है, वो साल 2008 से पत्रकारिता कर रहे हैं. एजुकेशनल क्वालिफिकेशन की बात करें तो उन्होंने बैंगलौर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म, और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.

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