8th Pay Commission Latest Update: सरकारी गलियारों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर की है. कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं, और अगर ये मांगें मान ली गईं, तो कर्मचारियों की लॉटरी लगनी तय है. इसे आसान भाषा में समझें तो यह एक गुणांक (Multiplier) है. आपकी मौजूदा बेसिक सैलरी को इस नंबर से गुणा किया जाता है, जिससे आपकी नई बेसिक सैलरी निकलती है. जैसे कि 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था. इसने न्यूनतम बेसिक सैलरी को 7000 से बढ़ाकर 18000 कर दिया था. कर्मचारी यूनियनें इस बार इसे 2.86 से 3.25 के बीच रखने की मांग कर रही हैं.
18000 से 58500 रुपये हो जाएगी चपरासी की सैलरी !
अगर सरकार यूनियनों की सबसे ऊंची मांग यानी 3.25 का फिटमेंट फैक्टर स्वीकार कर लेती है, तो सैलरी में जबरदस्त इजाफा होगा. यानी अगर सरकार 3.25 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी दे देती है तो 18000 सैलरी पाने वाली की सैलरी एक झटके में 58500 रुपये हो जाएगी. वहीं अगर फिटमेंट फैक्टर 3.00 रहता है तो सैलरी 54000 रुपये हो जाएगी. वहीं अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है तो चपरासी की सैलरी 18000 से बढ़कर 51480 रुपये हो जाएगी.
25 फरवरी की अहम बैठक
8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है. 25 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में एक बड़ी मीटिंग होने जा रही है. इसमें नेशनल काउंसिल (JCM) की ड्राफ्टिंग कमेटी शामिल होगी. कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांगों का एक संयुक्त मेमोरेंडम तैयार करने के लिए ये बैठक हो रही है, जिसे वेतन आयोग को सौंपा जाएगा.
पेंशनभोगियों के लिए भी खुशखबरी
यह बदलाव सिर्फ काम कर रहे कर्मचारियों के लिए नहीं है. फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का सीधा असर पेंशन (Pension) पर भी पड़ेगा. अगर फिटमेंट फैक्टर 3.0 से ऊपर जाता है, तो पेंशनभोगियों की मासिक राशि में भी शानदार बढ़ोतरी देखी जाएगी.
ध्यान रखने वाली बात
हालांकि सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में 58500 रुपये की चर्चा गरम है, लेकिन अभी सरकार की ओर से किसी आधिकारिक नंबर पर मुहर नहीं लगी है. सरकार देश की अर्थव्यवस्था और बजट को ध्यान में रखकर ही अंतिम फैसला लेगी. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.5 के बीच रह सकता है, जिससे न्यूनतम वेतन 35000 से 45000 रुपये के करीब पहुंच सकता है.