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क्या हेलमेट की भी होती है एक्सपायरी डेट? जानें कितने साल बाद बदल देना चाहिए Helmet

हेलमेट बाहर से बिल्कुल ठीक दिख रहा है तो जरूरी नहीं कि ये पूरी तरह सुरक्षित हो. तो चलिए जानते हैं कितने साल पुराने हेलमेट को बदलना चाहिए और किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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हेलमेट बाहर से ठीक दिख रहा है फिर भी हो सकता है खतरनाक! (Image Credit- Magnifc)

बाइक या स्कूटर चलाते समय हेलमेट सबसे जरूरी होता है. लेकिन अक्सर लोग हलमेट खरीदने के बाद उसे कई सालों तक इस्तेमाल करते रहे हैं. अक्सर जब तक हेलमेट बार से ठीक दिख रहा होता है लोग उसे बदलने की जरूरी नहीं समझते. ये सोचना ही भरी पड़ सकता है. हेलमेट जितना पुराना होता है हेलमेट की पैडिंग, फिटिंग और दूसरे हिस्सों की हालात खराब हो सकती है. ऐसे में ये समझना सबसे जरुरी है कि इसे कब बदला जाए.

क्या ज्यादा पुराना हेलेमेट कम सुरक्षित होता है?

ऐसा सीधे तौर पर कहे जाना सही नहीं होगा. लेकिन समय के साथ हेलमेट के अंदर लगी पैडिंग और लाइनिंग अपना शेप और मजबूती खोने लगती है और इसका सीधा असर फिटिंग पर पड़ता है. अगर हेलमेट सिर पर फिट नहीं बैठ रहा तो इससे दुर्घटना के समय उतनी सुरक्षा नहीं मिलेगी, जितनी इसके फिट होने पर मिल सकती है.

बार-बार हेलेमट गिर जाता है तो ये सावाधानी जरूरी

हेलमेट का रोज इस्तेमाल के दौरान कभी कभार इसका गिरने या उस पर लगना बेहद आम बात है. लेकिन ऐसा लगातार और अक्सर हो जात है तो इसे इग्नोर करना सही नहीं है. कई बार बाहर से हेलमेट पर बनड़ा कुछ नुकसान दिखाई नहीं देता है लेकिन तेज टक्कर या बार-बार गिरने स इसके अंदर सुरक्षा देने वाले हिस्से प्रभावित हो सकते है. खासकर जब हेलमेट किसी हादसे या तेज गिरने के बाद जोर से टकराया हो. तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के पहले जांच लेना या बदल लेना ठीक होता है.

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हेलमेट कितने साल में बदलना चाहिए?

अगर आपका हेलमेट 5 साल से ज्यादा पुराना हो गया है तो उसे बदलने के बारे में जरूर सोचना चाहिए. लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण हेलमेंट के अलग-अलग हिस्सों की क्षमता कम हो सकती है. हालांकि की ये पूरी तरह आपके उपयोग पर निर्भर करता है क्योंकि अगर आप रोज गाड़ी नहीं चलाते है और कभी-कभी ही गाड़ी चलाते समय हेलमेट पहनते हैं और आपका हेलमेट सही कंडीशन में है तो ये 5 साल से ज्यादा भी चल सकता है.

ये भी पढ़ें- Half Helmet vs Full Helmet: हाफ या फुल फेस हेलमेट, सड़क पर कौन बचाएगा आपकी जान?

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इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

  • हेलमेट की पैडिंग ढीली होना
  • स्टैप ठीक से नहीं लगना
  • हेलमेट की फिटिंग में गड़बड़ी
  • हेलमेट में दरार या टूट-फूट
  • ये सभी संकेत दिखें तो हेलमेंट बदलना बेहतर होता है.

नया हेलमेट लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • हमेशा ISI/BIS वाला हेलमेट ही लें, जो असली सुरक्षा मानक पूरा करता हो.
  • हाफ-फेस या ओपन फेस की बजाय फुल फेस हेलमेट चुनें यह आपके जबड़े और ठोड़ी को भी सुरक्षित रखता है.
  • हेलमेट आपके सिर के साइट के मुताबिक होना चाहिए.
  • हेलमेट की अंदर की कुशनिंग और पैडिंग चेक करें, कि ये आरामदायक हो.
  • चिन स्ट्रैप (लॉक) की गुणवत्ता मजबूत हो ताकि झटके में खुले या टूटे नहीं.

पैसे बचाने के लिए सुरक्षा से समझौता न करें

कई बार लोग पैसे बचाने के लिए पुराने हेलमेट को जरूरत से ज्यादा समय तक इस्तेमाल करते रहे हैं. लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. ऐसे में एक अच्छा और बेहतर क्वालिटी का हेलमेंट आपके सेफ्टी के लिए बहुत जरूरी है. इसलिए अगर आपका हेलमेट काफी पुराना है या उसमें नुकसान के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो नया हेलमेट लेने पर विचार जरूर करें.

ये भी पढ़ें- क्या रिजर्व पर बाइक चलाने से खराब होता है इंजन, Reserve पर कितने किमी चल सकती है गाड़ी?

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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