Car Tyre Safety Tips: कार चलाते समय हम अक्सर इंजन, माइलेज और सर्विसिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे अहम चीज यानी टायर को कई बार नजरअंदाज कर देते हैं. आमतौर पर लोग टायर तब तक नहीं बदलते जब तक वह पूरी तरह घिस न जाए. जबकि सच्चाई यह है कि टायर पहले से ही कई संकेत देने लगते हैं कि अब उन्हें बदलने का समय आ गया है. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो गाड़ी की ब्रेकिंग कमजोर हो सकती है, बैलेंस बिगड़ सकता है और हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि टायर कब बदलना चाहिए और कौन-कौन से संकेत इस बात की तरफ इशारा करते हैं.
टायर की उम्र कितनी होती है?
कार के टायर हमेशा के लिए नहीं चलते. आमतौर पर किसी भी कार के टायर की उम्र लगभग 5 से 6 साल मानी जाती है. दूरी के हिसाब से देखें तो ये करीब 40,000 से 80,000 किलोमीटर तक चल सकते हैं. कई बार ऐसा होता है कि टायर ऊपर से सही दिखते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी रबर कमजोर होने लगती है. यही वजह है कि 6 साल से ज्यादा पुराने टायर इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता. विशेषज्ञ तो यहां तक सलाह देते हैं कि 10 साल से ज्यादा पुराने टायर कभी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए, चाहे वे देखने में सही क्यों न लगें.
---विज्ञापन---
1. जब टायर की ग्रिप कम होने लगे
अगर बारिश या गीली सड़क पर गाड़ी चलाते समय आपको लगता है कि कार आसानी से फिसल रही है या ब्रेक लगाने पर पहले जैसी पकड़ नहीं मिल रही, तो यह टायर की कमजोर ग्रिप का संकेत हो सकता है. टायर पर बने ट्रेड पैटर्न सड़क पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं. जैसे-जैसे ये ट्रेड घिसते जाते हैं, वैसे-वैसे गाड़ी की पकड़ भी कम होती जाती है. ऐसी स्थिति में टायर बदलने पर विचार करना चाहिए.
---विज्ञापन---
2. टायर पर दरारें या कट दिखना
समय के साथ टायर की रबर सख्त होने लगती है. खासकर अगर कार लंबे समय तक धूप में खड़ी रहती है तो यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है. अगर आपको टायर की साइड वॉल पर छोटी-बड़ी दरारें, कट या उभरे हुए हिस्से दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत है कि टायर कमजोर हो चुका है और किसी भी समय फट सकता है, खासकर हाईवे पर तेज स्पीड में.
3. तय दूरी पूरी हो जाना
आमतौर पर कार के टायर 40,000 से 50,000 किलोमीटर तक आराम से चल जाते हैं, लेकिन यह पूरी तरह आपकी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और मेंटेनेंस पर निर्भर करता है. अगर आपकी गाड़ी इस दूरी के आसपास चल चुकी है, तो एक बार टायर की अच्छी तरह जांच करवा लेना बेहतर होता है. कई बार टायर ऊपर से ठीक दिखते हैं लेकिन अंदर से कमजोर हो चुके होते हैं.
4. टायर का असमान तरीके से घिसना
अगर टायर एक तरफ से ज्यादा घिस रहा है या बीच का हिस्सा ज्यादा पतला हो गया है, तो यह व्हील अलाइनमेंट या सस्पेंशन की समस्या का संकेत हो सकता है. लंबे समय तक ऐसे टायर इस्तेमाल करने से गाड़ी का बैलेंस बिगड़ सकता है और ड्राइविंग भी असुरक्षित हो जाती है. इसके अलावा असमान घिसे टायर से माइलेज पर भी असर पड़ता है.
5. टायर की उम्र
बहुत कम लोग जानते हैं कि टायर की भी एक तरह की एक्सपायरी होती है. चाहे आपने कार कम चलाई हो, लेकिन 5 से 6 साल के बाद टायर बदल देना बेहतर माना जाता है. टायर पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट से उसकी उम्र का पता लगाया जा सकता है. पुराना टायर अंदर से कमजोर हो जाता है और अचानक फेल हो सकता है.
सुरक्षा के लिए समय पर टायर बदलना जरूरी
कार के चारों टायर ही आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं. इसलिए अगर ऊपर बताए गए संकेतों में से कोई भी दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें. सही समय पर टायर बदलने से न सिर्फ गाड़ी की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है, बल्कि सड़क पर आपकी सुरक्षा भी बनी रहती है.
ये भी पढ़ें- क्या गर्मी में सफेद कार के मुकाबले काली कार ज्यादा गर्म होती है? जान लें सही फैक्ट