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ड्राइविंग के दौरान दिखें ये 5 संकेत, समझ लें कार के टायर बदलने का वक्त आ गया

अक्सर लोग कार के टायर तब तक नहीं बदलते जब तक वे पूरी तरह घिस न जाएं. लेकिन टायर पहले ही कई संकेत देने लगते हैं कि अब उन्हें बदलना जरूरी है. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो गाड़ी की पकड़ कमजोर हो सकती है और हादसे का खतरा भी बढ़ सकता है.

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कार चलाते समय दिखें ये लक्षण तो तुरंत बदलें टायर. (Photo- Freepik)

Car Tyre Safety Tips: कार चलाते समय हम अक्सर इंजन, माइलेज और सर्विसिंग पर ध्यान देते हैं, लेकिन सबसे अहम चीज यानी टायर को कई बार नजरअंदाज कर देते हैं. आमतौर पर लोग टायर तब तक नहीं बदलते जब तक वह पूरी तरह घिस न जाए. जबकि सच्चाई यह है कि टायर पहले से ही कई संकेत देने लगते हैं कि अब उन्हें बदलने का समय आ गया है. अगर इन संकेतों को नजरअंदाज किया जाए तो गाड़ी की ब्रेकिंग कमजोर हो सकती है, बैलेंस बिगड़ सकता है और हादसे का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि टायर कब बदलना चाहिए और कौन-कौन से संकेत इस बात की तरफ इशारा करते हैं.

टायर की उम्र कितनी होती है?

कार के टायर हमेशा के लिए नहीं चलते. आमतौर पर किसी भी कार के टायर की उम्र लगभग 5 से 6 साल मानी जाती है. दूरी के हिसाब से देखें तो ये करीब 40,000 से 80,000 किलोमीटर तक चल सकते हैं. कई बार ऐसा होता है कि टायर ऊपर से सही दिखते हैं, लेकिन समय के साथ उनकी रबर कमजोर होने लगती है. यही वजह है कि 6 साल से ज्यादा पुराने टायर इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता. विशेषज्ञ तो यहां तक सलाह देते हैं कि 10 साल से ज्यादा पुराने टायर कभी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए, चाहे वे देखने में सही क्यों न लगें.

1. जब टायर की ग्रिप कम होने लगे

अगर बारिश या गीली सड़क पर गाड़ी चलाते समय आपको लगता है कि कार आसानी से फिसल रही है या ब्रेक लगाने पर पहले जैसी पकड़ नहीं मिल रही, तो यह टायर की कमजोर ग्रिप का संकेत हो सकता है. टायर पर बने ट्रेड पैटर्न सड़क पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं. जैसे-जैसे ये ट्रेड घिसते जाते हैं, वैसे-वैसे गाड़ी की पकड़ भी कम होती जाती है. ऐसी स्थिति में टायर बदलने पर विचार करना चाहिए.

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2. टायर पर दरारें या कट दिखना

समय के साथ टायर की रबर सख्त होने लगती है. खासकर अगर कार लंबे समय तक धूप में खड़ी रहती है तो यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है. अगर आपको टायर की साइड वॉल पर छोटी-बड़ी दरारें, कट या उभरे हुए हिस्से दिखाई दें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत है कि टायर कमजोर हो चुका है और किसी भी समय फट सकता है, खासकर हाईवे पर तेज स्पीड में.

3. तय दूरी पूरी हो जाना

आमतौर पर कार के टायर 40,000 से 50,000 किलोमीटर तक आराम से चल जाते हैं, लेकिन यह पूरी तरह आपकी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति और मेंटेनेंस पर निर्भर करता है. अगर आपकी गाड़ी इस दूरी के आसपास चल चुकी है, तो एक बार टायर की अच्छी तरह जांच करवा लेना बेहतर होता है. कई बार टायर ऊपर से ठीक दिखते हैं लेकिन अंदर से कमजोर हो चुके होते हैं.

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4. टायर का असमान तरीके से घिसना

अगर टायर एक तरफ से ज्यादा घिस रहा है या बीच का हिस्सा ज्यादा पतला हो गया है, तो यह व्हील अलाइनमेंट या सस्पेंशन की समस्या का संकेत हो सकता है. लंबे समय तक ऐसे टायर इस्तेमाल करने से गाड़ी का बैलेंस बिगड़ सकता है और ड्राइविंग भी असुरक्षित हो जाती है. इसके अलावा असमान घिसे टायर से माइलेज पर भी असर पड़ता है.

5. टायर की उम्र

बहुत कम लोग जानते हैं कि टायर की भी एक तरह की एक्सपायरी होती है. चाहे आपने कार कम चलाई हो, लेकिन 5 से 6 साल के बाद टायर बदल देना बेहतर माना जाता है. टायर पर लिखी मैन्युफैक्चरिंग डेट से उसकी उम्र का पता लगाया जा सकता है. पुराना टायर अंदर से कमजोर हो जाता है और अचानक फेल हो सकता है.

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सुरक्षा के लिए समय पर टायर बदलना जरूरी

कार के चारों टायर ही आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालते हैं. इसलिए अगर ऊपर बताए गए संकेतों में से कोई भी दिखे तो उसे नजरअंदाज न करें. सही समय पर टायर बदलने से न सिर्फ गाड़ी की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है, बल्कि सड़क पर आपकी सुरक्षा भी बनी रहती है.

ये भी पढ़ें- क्या गर्मी में सफेद कार के मुकाबले काली कार ज्यादा गर्म होती है? जान लें सही फैक्ट

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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