त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही ऑटो कंपनियों के लिए एक नई परेशानी खड़ी हो गई है. गाड़ियों की मांग अच्छी बनी हुई है, लेकिन दूसरी तरफ उन्हें बनाने में इस्तेमाल होन वाला कच्चा माल लगातार महंगा हो रहा है. स्टील, रबर, एल्युमिनियम, कॉपर और सेमीकंडक्टर जैसी जरूरी चीजों की कीमत बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ गई है. अब कंपनियों को सामने दो रास्ते हैं या तो इस बढ़ी हु लागत क बोझ खुद उठाएं या गाड़ियों की कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डाले. अगर कीमतें बढ़ती हैं तो त्योहारी सीजन में बिक्री पर असर पड़ने का डर भी है.

स्टील की बढ़ती कीमत बनी बड़ी चिंता

कमर्शियल व्हीकल कारोबार पर बढ़ती कमोडिटी कीमतों का खासा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के कर्मशियल व्हीकल कारोबार में स्टील की लागत करीब 40 फसदी है. जब तक सेफगार्ड ड्यूटी नहीं हटती, तब तक स्टील की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद करना मुश्किल है. ऐसे में आने वाले समय में लागत का दबाव बना रह सकता है.

---विज्ञापन---

रबर, एल्युमिनियम और कॉपर भी हुए महंगे

सिर्फ स्टील ही नहीं रबर एल्युमिनिय और कॉपर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. खासकर इलेक्ट्रिक वाहनों में कॉपर का इस्तेमाल ज्यादा होता है. इसलिए इसकी कीमत बढ़ने का असर EV कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है. ऐसे में अगर लागत में कमी नहीं आती तो हो सकता है कीमतों में बढ़ोतरी हो.

ऑटो पार्ट्स और टायर कंपनियों पर भी असर

कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ वाहन बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं है. ऑटो पार्ट्स और टायर कंपनियां भी इसकी मार झेल रही हैं. क्योंकि अभी स्टील, कॉपर, एल्युमिनियम और सेमीकंडक्टर की कीमतों में बढ़ोंतरी देखने को मिली है. इससे हो सकता है कि आगे चलकर टायरों की भी कीमत में बढ़ोतरी हो.

---विज्ञापन---

इधर रिपोर्टस के मुताबिक, इस साल कॉपर की कीमत करीब 10 फीसदी, स्टील की कीमत लगभग 24 फीसदी और रबर करीब 53 फीसदी महंगा हुआ है. 

कंपनियां पहले ही बढ़ा चुकी हैं दाम

कई ऑटो कंपनियां लागत बढ़ने के बीच कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है. Maruti Suzuki ने जून में FY27 की पहली कीमत बढ़ोतरी की थी, जिसमें औसतन करीब 0.5 फीसदी की वृद्धि हुई। कंपनी ने अगस्त से एक और बढ़ोतरी का संकेत दिया था. Honda Cars India ने भी अगस्त की शुरुआत से कीमतें बढ़ाई हैं. वहीं Hyundai Motor India फिलहाल कीमत बढ़ाने से पहले लागत कम करने और सोच-समझकर कीमत तय करने की रणनीति पर काम कर रही है.

---विज्ञापन---

त्योहारी सीजन में बढ़ेगा कंपनियों का दबाव

त्योहारी सीजन ऑटो कंपनियों के लिए साल का सबसे अहम दौर होता है. इस दौरान कार और बाइक खरीदने वालों की संख्या आमतौर पर बढ़ती है. ऐसे में कंपनियां इस समय कीमत बढ़ाकर ग्राहकों को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहेंगी. दूसरी तरफ, लगातार बढ़ती लागत को लंबे समय तक खुद उठाना भी कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा.

ग्राहकों पर पड़ सकता है कीमत बढ़ने का असर

फिलहाल कंपनियां लागत कम करने खर्च को नियंत्रित करने और कुछ हिस्से का बोझ खुद उठाने जैसे विकल्पों पर काम कर रही हैं. लेकिन अगर स्टील, रबर, कॉपर और दूसरी कमोडिटी की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो आगे गाड़ियों और ऑटो पार्ट्स की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें- क्या टोल प्लाजा के नजदीक रहने वालों के लिए टोल फ्री होता है या मिलती है कोई छूट? समझें नियम

---विज्ञापन---