Shani Gochar: ज्योतिष शास्त्र में शनि गोचर, चाहे वह राशि परिवर्तन यह नक्षत्र गोचर, बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है, ज्योतिष शास्त्र में शनि के दायित्व और उनका अधिकार क्षेत्र। वे कर्मों का न्यायाधीश और न्याय के कारक ग्रह हैं। इसलिए उनका करवट बदलना भी सभी राशियों को गहराई से प्रभावित करता है और देश-दुनिया पर भी व्यापक असर होता है.

रेवती नक्षत्र में शनि गोचर का असर

द्रिक पंचांग के अनुसार, रविवार 17 मई, 2026 को शनि ग्रह उत्तर भाद्रपद नक्षत्र से निकलकर रेवती में गोचर करेंगे। एक 'शनि वर्ष' में यह शनि ग्रह का अंतिम गोचर है। आपको बता दें कि एक शनि वर्ष पृथ्वी के लगभग 30 वर्षों के बराबर होता है। आइए ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य से जानते हैं कि शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन किस सेक्टर को सबसे अधिक प्रभावित करेगा और यह असर कैसा होगा?

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आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर असर

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, शनि ग्रह बुध के स्वामित तिषाचार्य के अनुसार, शनि का रेवती नक्षत्र में विराजमान होना आईटी, बैंकिंग और फिनटेक सेक्टर में बड़े बदलाव ला सकता है। बैंकिंग के नियम और अधिक कड़े हो सकते हैं। एआई (AI) और डाटा सुरक्षा से जुड़ी इंडस्ट्री में स्थिरता के साथ रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं।

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रियल एस्टेट और माइनिंग सेक्टर

वैदिक ज्योतिष में शनि निर्माण और खनिजों के कारक माने गए हैं। भवन निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े अधूरे और बड़े प्रोजेक्ट तेजी से पूरे हो सकते हैं। लेकिन धातु विशेष कर लोहा, खदानें, कच्चा तेल और इस्पात उद्योग में कीमतें उतार-चढ़ाव से भरी होंगी।

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टूरिज्म और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर असर

ज्योतिष शास्त्र में रेवती नक्षत्र को लंबी दूरी की यात्राओं और मार्गों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है इसलिए शनि का यह गोचर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र पर असर डालेगा। वैश्विक व्यापार में नए बदलाव होंगे। एविएशन और टूरिज्म इंडस्ट्री में नियम कड़े हो सकते हैं।

शेयर बाजार पर असर

बुध के नक्षत्र में शनि के गोचर से शेयर बाजार पर गहरा असर होने के योग हैं। लेकिन, बाजार में अचानक तेजी या मंदी की अपेक्षा टिकाऊ बढ़त हो सकती है और यह धीरे-धीरे होगी। आपको बता दें कि फार्मा सेक्टर पर असर होगा और इसमें निवेश की बाढ़ आ सकती है।

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