Kaal Sarp Dosh Kya Hai: पंचांग की खगोलीय घटनाओं के अनुसार, 11 मई से लेकर 26 मई, 2026 तक राशिमंडल में कालसर्प योग (Kaal Sarp Yog) की स्थितियां बन रही हैं. ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प योग को बेहद खतरनाक बताया गया है. आइए जानते हैं, कालसर्प योग क्या है, यह क्यों खतरनाक माना जाता है और यह कब सबसे ज्यादा प्रभावी होता है?
कालसर्प दोष क्या है?
कालसर्प योग या दोष किसी भी बर्थ चार्ट यानी जन्मकुंडली की वह स्थिति होती है, जब कुंडली के 7 ग्रह यानी सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु, शुक्र, मंगल और शनि राहु और केतु के बीच में स्थित होते हैं. राहु के भाग को कालसर्प का मुंह और केतु के भाग को कालसर्प का पूंछ माना जाता है. ज्योतिष मान्यता है कि राहु-केतु के बीच सभी ग्रहों के होने से उनकी स्थिति लगभग बलहीन जैसी होती है. वे शुभ फल देने में असमर्थ होटे हैं.
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कालसर्प दोष क्यों है खतरनाक?
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कालसर्प योग मनुष्य के पूर्व जन्मों का फल है, जो व्यक्ति के जीवन में मुश्किलें बढ़ाता है, लक्ष्य और सफलता के लिए संघर्ष करना पड़ता है, कार्य में विलंब होता है. व्यक्ति मानिसक रूप से परेशान और तनावग्रस्त रहता है. यह योग बेहद खतरनाक इसलिए है, क्योंकि इससे:
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व्यक्ति के जीवन में बेहद उतार और चढ़ाव आते हैं, जिसे झेलना मुश्किल होता है.
मैरिड लाइफ में झगड़े होते हैं, दंपति के बीच हमेशा अनबन और तनाव रहता है.
संतान से कष्ट मिलता है, संतान सुख प्राप्त करने में बेहद विलंब होता है.
करियर और व्यापार में अचानक धन हानि होती है.
व्यक्तिगत मान-सम्मान पर असर होता है, अपमान झेलना पड़ सकता है.
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कालसर्प दोष कब होता है सबसे ज्यादा प्रभावी?
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष है, तो यह सबसे ज्यादा प्रभावी तब होता है, जब राहु की महादशा या अंतर्दशा चलती है. मान्यता है कि इस समय यह योग सबसे अधिक सक्रिय होता है. वे यह बताते हैं कि यह जीवन के पूर्वार्ध यानी 45 से 50 वर्ष से पहले ही प्रभावी रहता है, हालांकि कुछ कुंडलियों में यह जीवन भर बना रह सकता है.
कालसर्प दोष निवारण के उपाय
ज्योतिष शास्त्र की पुस्तकों में कालसर्प दोष से मुक्ति और राहत के लिए शिव पूजा और साधना को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. ज्योतिषाचार्य शांडिल्य के अनुसार, जो व्यक्ति इस दोष से पीड़ित हैं, उन्हें:
सोमवार के दिन शिवलिंग पर अभिषेक करना चाहिए.
पंचमुखी रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए.
ज्योतिष ग्रंथों में शास्त्रीय उपाय यह है कि चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा जल में प्रवाहित करें.
मान्यता है कि घर में मोरपंख रखने से भी कालसर्प दोष में लाभ होता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.