Career Astrology Predictions: कड़ी मेहनत तो बहुत लोग करते हैं, क्या सभी को एक समान सफलता मिलती है. नहीं, ऐसा नहीं है. किसी कम तो किसी को मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इसका कारण कुंडली का दशम भाव यानी कर्म भाव और उससे जुड़े ग्रह हो सकते हैं. आइए कुंडली अध्ययन कर खुद से जानते हैं कि करियर और सफलता में रोड़े अटकाने वाले ग्रह और दोष कौन-से हैं?
दशम भाव है बेहद अहम
किसी भी कुंडली का दशम भाव व्यक्ति के कामकाज, नौकरी, कारोबार आदि के बारे में बतलाता है. इसलिए इसे कर्म स्थान कहते हैं. इस भाव और इस भाव के स्वामी यानी दशमेश को कमजोर नहीं होना चाहिए. दशमेश के 6ठें, 8वें या 12वें भाव में बैठ जाने से करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं. वहीं, इस भाव पर राहु, केतु और शनि की नकारात्मक दृष्टि से नौकरी छूटने का डर रहता है.
ये ग्रह बनते हैं करियर में बाधा
शनि को ज्योतिष में कर्म का नियंत्रक ग्रह माना गया है. इनके नीच या वक्री होने से मेहनत का फल देर से मिलता है या नहीं मिलता है. वहीं, शनि पर राहु-केतु दृष्टि से काम का श्रेय दूसरे लोग ले जाते हैं. सूर्य के कमजोर होने से काम में वो सम्मान नहीं मिलता है, जो मिलना चाहिए. बॉस और सीनियर का सपोर्ट भी नहीं मिलता है. जिन लोगों का बुध कमजोर होता है, वे कारोबार में प्रायः सफल नहीं होते हैं. पीड़ित बुध के कारण अक्सर फैसले गलत होते हैं और घाटा होता है.
दशा और कुंडली दोष
यह देखा गया है कि जब कुंडली के 6ठें, 8वें या 12वें भाव के स्वामियों की महादशा या अंतर्दशा चल रही होती है, तो बनता हुआ काम भी बिगड़ जाता है. चलता हुआ काम अटक जाता है. वहीं, कुंडली में पितृ दोष, ग्रहण दोष, अंगारक दोष आदि होने पर करियर की ग्रोथ रुक जाती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी अंक ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.