Birth Chart Secrets: वैदिक ज्योतिष में एक कुंडली के 12 भाव या घर होते हैं. इनमें से अष्टम और द्वादश भाव को बेहद गुप्त और सबसे रहस्यमय माना गया है. ये दोनों भाव कुंडली के दु:स्थान भी माने जाते हैं, जो त्रिक भाव में शामिल हैं. कहते हैं, इन दोनों घरों के रहस्य अच्छे से अच्छे ज्योतिष भी नहीं जान पाते हैं, क्योंकि ये अनदेखे पहलुओं और अचानक होने वाली घटनाओं से जुड़े माने गए हैं, जिसकी ज्योतिष भविष्यवाणी करना असंभव है. आइए जानते हैं, इन दोनों भावों का महत्व और ज्योतिष रहस्य.
अष्टम भाव – गुप्त धन और अचानक बदलाव
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि अष्टम भाव जीवन, मृत्यु और गुप्त चीजों का प्रतिनिधित्व करता है. इसे भाव के स्वामी मंगल माने जाते हैं. तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, ज्योतिष, शोध जैसे विषय भी इसी भाव से जुड़े हैं. इस भाव को अचानक धन लाभ का घर भी कहा गया है, क्योंकि इसका संबंध वसीयत, पैतृक संपत्ति, बीमा का पैसा, लॉटरी और शेयर मार्केट से है.
ज्योतिषाचार्य शांडिल्य के अनुसार, जब अष्टम भाव का स्वामी छठवें या बारहवें भाव में होता है, तो विपरीत राजयोग बनाता है. यह योग व्यक्ति को कठिन से कठिन हालात से निकाल देता है और व्यक्ति को अचानक भारी धन लाभ करवाता है.
द्वादश भाव – गुप्त धन और अचानक बदलाव
वैदिक ज्योतिष में द्वादश भाव कुंडली का अंतिम घर है, जो अपने अंदर अनेक रहस्यमय पहलुओं को समेटे हुए हुए है. इनमें अवचेतन मन, सपने, अलगाव, मोक्ष आदि प्रमुख हैं. यह मुख्य रूप से विदेशी भूमि के बारे में बताता है.
ज्योतिषाचार्य शांडिल्य के अनुसार, जब कुंडली के नवें भाव के स्वामी (भाग्येश) या पहले के भाव के स्वामी (लग्नेश) कुंडली के 12वें भाव में बैठ जाते हैं, तो व्यक्ति विदेश की यात्रा करता है. जब राहु और केतु का इस घर से संबंध होता है, व्यक्ति विदेश में स्थायी रूप से निवास करता है. मल्टीनेशनल कंपनी में काम और विदेश व्यापार भी इन्हें योगों के कारण होता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी अंक ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.