मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है. शनिवार सुबह ईरान के सबसे महत्वपूर्ण यूरेनियम एनरिचमेंट परिसर 'नतांज' पर भीषण हमला हुआ है. ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के मुताबिक. इस हमले के पीछे अमेरिका और इजराइल का हाथ है. हालांकि राहत की बात यह है कि इस हमले के बाद किसी भी तरह के रेडियोएक्टिव मैटेरियल के लीक होने की खबर नहीं है. तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित यह फैसिलिटी ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ मानी जाती है. इजराइल ने आधिकारिक तौर पर इस हमले से पल्ला झाड़ लिया है. लेकिन रूस ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है.

IAEA की जांच और रूस का तीखा पलटवार

परमाणु ऊर्जा पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था (IAEA) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. संस्था के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि परमाणु केंद्रों को युद्ध का हिस्सा बनाना पूरी दुनिया के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है. वहीं. रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कड़े शब्दों में अमेरिका और इजराइल की निंदा की है. रूस का कहना है कि नतांज जैसी साइट जो अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है. उस पर हमला करना संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का अपमान है. जखारोवा के मुताबिक. ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कदम पूरे मिडिल ईस्ट में ऐसी तबाही ला सकते हैं जिसे संभालना किसी के बस में नहीं होगा.

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व्हाइट हाउस का रुख और इजराइल की चेतावनी

दूसरी तरफ. व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि उनका मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. 28 फरवरी से शुरू हुए इस ताजा संघर्ष में अमेरिका और इजराइल की सेनाएं मिलकर ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना रही हैं. इसी बीच इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल कैट्ज ने एक डराने वाला बयान जारी किया है. कैट्ज ने कहा है कि रविवार से शुरू होने वाले हफ्ते में ईरान पर हमलों की रफ्तार और तीव्रता को कई गुना बढ़ा दिया जाएगा. इजराइली सेना (IDF) और अमेरिकी सेना अब सीधे तौर पर उन ठिकानों को तबाह करने की रणनीति पर काम कर रही हैं. जिन पर ईरानी शासन और उसकी ताकत निर्भर है.

मानवीय संकट और पर्यावरण पर खतरा

नतांज पर हुए इस हमले ने न केवल युद्ध की आग को भड़काया है. बल्कि पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. हालांकि अभी रेडिएशन फैलने का खतरा नहीं बताया गया है. लेकिन बार-बार परमाणु केंद्रों को निशाना बनाने से आस-पास की आबादी खौफ में है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस वक्त दो गुटों में बंटा नजर आ रहा है. जहाँ एक तरफ सुरक्षा के नाम पर हमलों को जायज ठहराया जा रहा है. वहीं रूस और अन्य देश इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं. अगर आने वाले दिनों में कूटनीतिक समाधान नहीं निकला. तो मिडिल ईस्ट से शुरू हुई यह चिंगारी पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और शांति को स्वाहा कर सकती है.