ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों का सीजफायर चल रहा है। लेकिन अब इसपर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। गत 8 अप्रैल को दोनों देशों ने 2 हफ्तों के सीजफायर पर आपसी सहमति जताई थी। यह डेडलाइन 22 अप्रैल को पूरी हो रही है। अफगानिस्तान में दोनों देशों की बीच बैठक फेल होने के बाद अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी कर दी। ऐसे में अब सीजफायर पर भी संकट के बाद छा रहे हैं। सीजफायर बढ़ाने पर व्हाइट हाउस ने भी बयान जारी किया है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गत 7 अप्रैल को ईरान की सभ्यता खत्म करने का ऐलान किया था। हालांकि हमला से पहले ही ईरान और अमेरिका के बीच 2 हफ्तों की सीजफायर हो गया। इसके बाद शांति बैठक के लिए दोनों देश पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंचे। यहां बैठक असफल रही। दोनों अपनी अपनी शर्तों पर अड़े रहे और बैठक बेनतीजा रही। बैठक के बाद अमेरिका ने हॉर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी कर दी। 10 हजार कमांडो हॉर्मुज स्ट्रेट में उतार दिए।
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अब सीजफायर की डेडलाइन नजदीक आ रही है। 22 अप्रैल को सीजफायर के 2 हफ्ते पूरे होने वाले हैं। हालांकि रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देश सीजफायर को और 2 हफ्ते बढ़ाने पर "सैद्धांतिक" तौर पर राजी हैं, ताकि बातचीत के लिए वक्त मिल सके। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वो इसे आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं और डील चाहते हैं।
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क्या बोला व्हाइट हाउस?
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि मैंने सुबह कुछ गलत रिपोर्टिंग देखी, जिसमें यह कहा गया था कि अमेरिका ने सीजफायर बढ़ाने का अनुरोध किया है। फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक मांग नहीं की गई है। कहा कि अमेरिका मौजूदा माध्यमों के ज़रिए ईरान के साथ बातचीत में लगा हुआ है। सीनियर लेवल पर चर्चाएं जारी हैं। व्हाइट हाउस का यह बयान साफ कर रहा है कि सीजफायर को आगे बढ़ाने के लिए अभी को औपचारिक प्रयास शुरू नहीं हुए हैं। प्रेस सेक्रेटरी ने कहा कि हम इन बातचीत और चर्चाओं में पूरी तरह से शामिल हैं।
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