ईरान और अमेरिका में 40 दिन युद्ध के बाद करीब 2 हफ्तों का सीजफायर हो गया। लेकिन इस्लामाबाद मीटिंग फेल होने से अब सीजफायर पर खतरा मडराने लगा है। लोगों में डर है कि वार्ता फेल होने से क्या सीजफायर की अवधि की आगे बढ़ेगी या दोनों देश इसका उल्लघंन करेंगे। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुलह की गुंजाईश अभी भी बाकी है।

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद उलझते दिख रहे हैं। पाकिस्तान में बैठक के बाद कोई नतीजा नहीं निकला। Wall Street Journal रिपोर्ट में दावा किय गया है कि सुलह की गुंज़ाईश अभी भी बाकी है। अमेरिका और ईरान के बयानों के बीच द्विपक्षीय कूटनीति के लिए द्वार अभी भी खुले हैं। क्षेत्र के देशों ने अमेरिका के साथ सलाह की है ताकि दो सप्ताह के युद्धविराम को बढ़ाया जा सके।

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इधर, ईरान ने अब अमेरिका के लिए नई शर्त रख दी है। ईरानी के राष्ट्रपति महमूद पेज़ेश्कियन ने कहा कि यदि अमेरिकी सरकार अपना साम्राज्यवादी रवैया छोड़ दे और ईरान के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते के रास्ते निश्चित रूप से खुल जाएंगे।

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ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने X पर लिखा है कि हम बातचीत में इस्लामाबाद समझौते पर दस्तखत करने से बस कुछ हो दूर थे कि हमें अतिवाद, बदलते लक्ष्य और नाकाबंदी का सामना करना पड़ा। अब्बास ने लिखा कि 47 सालों में सर्वोच्च स्तर पर गहन वार्ता में ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए सद्भावनापूर्वक अमेरिका के साथ बातचीत की। लेकिन अमेरिका ने इतिहास से कोई सबक नहीं सीखा। सद्भावना से सद्भावना उत्पन्न होती है। शत्रुता से शत्रुता उत्पन्न होती है।

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