800 साल पुराने शिव मंदिर पर आमने-सामने क्यों हुई थाईलैंड-कंबोडिया की सेना? क्या कहते हैं इतिहासकार

थाईलैंड और कंबोडिया की सेना फिर आमने-सामने आ गई हैं. दोनों के बीच अमेरिका ने सीजफायर कराया था, लेकिन 45 दिन के भीतर ही युद्धविराम समझौता टूट गया.

SHIV MANDIR

2 दिन से दोनों देशों की सीमा पर झड़प हो रही हैं.

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दो देश भगवान शंकर के मंदिर को लेकर जंग करने के लिए खड़े हो गए. जंग ऐसी की दुनिया के ताकतवर देशों में शुमार अमेरिका को इस युद्ध को रुकवाने के लिए आगे आना पड़ा. हम बात कर रहे हैं थाईलैड और कंबोडिया के बीच ताजा झड़प की. दोनों देश प्राचीन खमेर हिंदू मंदिर पर अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं. दोनों के ऐतिहासिक दावों के बीच लगातार झड़प की खबरें सामने आ रही हैं. जिस मंदिर को लेकर विवाद है, वो करीब 800 साल पुराना है. इस मंदिर में शिवलिंग है, जिसकी पूजा करने पूरी दुनिया से शिव भक्त आते हैं. हम जानेंगे कि आखिर यह विवाद क्या है और इसको लेकर इतिहासकार क्या कहते हैं? साथ ही यह भी जानेंगे कि थाईलैंड और कंबोडिया में से ज्यादा ताकतवर कौन है?

क्या है विवाद

विवाद की मुख्य जड़ प्राचीन खमेर हिंदू मंदिर है. इस मंदिर को 12वीं सदी में राजा उदयादित्यवर्मन द्वितीय ने भगवान शिव को समर्पित किया था. मंदिर में एक प्राकृतिक शिवलिंग है. यह थाईलैंड के सुरीन प्रांत में पड़ता है. लेकिन इस मंदिर पर कंबोडिया भी अपना दावा करता रहा है. कंबोडिया इसके लिए अपनी ऐतिहासिक दलीलें भी दे रहा है.

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क्या कहते हैं इतिहासकार

जेएनयू के प्रोफेसर और इतिहासकार बिरेंद्र प्रसाद ने बताया कि जिस मंदिर को लेकर दोनों देशों में विवाद चल रहा है, उस मंदिर का नाम है ता मोअन मंदिर (प्रसाद ता मुएन थॉम). इस मंदिर का निर्माण जयवर्मन द्वितीय खमेर ने किया था. इस राजा को खमेर साम्राज्य का सबसे शक्तिशाली राजा माना जाता था. उस दौर में जयवर्मन द्वितीय का बहुत प्रभाव था. इसका साम्राज्य थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, लाओल, म्यांमार तक फैला हुआ था. इसके ही शासनकाल में कंबोडिया में दुनिया के सबसे बड़े हिन्दू मंदिर की स्थापना की गई थी. इस राजा ने अपने शासनकाल में सैकड़ों मंदिरों का निर्माण कराया था. इन्हीं में से एक है ता मोअन मंदिर का मंदिर, जिसे थाईलैंड और कंबोडिया की सीमा के पास बनाया गया था. यह कंबोडिया के ओदार मांचेय प्रांत और थाईलैंड के सुरीन प्रांत के बॉर्डर पर स्थित है.

थाईलैंड कितना ताकतवर

थाईलैंड के पास करीब 3.61 लाख एक्टिव सैनिक हैं. इसके अलावा 2 लाख सैनिक रिजर्व में भी हैं. थाईलैंड एयर फोर्स को कंबोडिया की वायुसेना से मजबूत माना जाता है. थाईलैंड एयरफोर्स के बेडे़ में 40 से 50 F-16 फाइटर विमान और SAAB ग्रिपेन जेस्ट लड़ाकू विमान हैं. AH-1 कोबरा समेत 100 से ज्यादा हेलीकॉप्टर और RQ-21 ब्लैकजैक जैसे ड्रोन शामिल हैं. वहीं, थलसेना की बात करें तो 1100 आर्टिलरी सिस्टम यानी M777 होवित्जर, M60 और VT-4 समेत 200 से ज्यादा टैंक शामिल हैं. इसके अलावा HIMARS जैसे आधुनिक मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम शामिल है. नेवी की बात करें तो 1 एयरक्राफ्ट कैरियर, 7 फ्रिगेट्स और 20 से ज्यादा कार्वेट युद्धपोत और 1 पनडुब्बी है. इस देश का सैन्य बजट 5.5 बिलियन डॉलर का है.

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कंबोडिया के पास कितनी ताकत

पूरी दुनिया में कंबोडिया की सेना 83वें नंबर पर आती है. इसके पास 1.70 लाख एक्टिव और करीब एक लाख रिजर्व सैनिक हैं. वायुसेना के बेड़े में कोई भी फाइटर जेट शामिल नहीं है. थल सेना के पास भी कोई आधुनिक टैंक या मिसाइल नहीं है. कंबोडियाई नौसेना में युद्धपोत और पनडुब्बी भी पुराने हैं. इन आंकड़ों पर नजर डालें तो कंबोडिया की सेना थाईलैंड की सेना के सामने बेहद ही कमजोर दिख रही है. थाईलैंड की ताकत को देखते हुए कहा जा सकता है कि कंबोडिया की तीनों सेना भी उसके सामने नहीं टिक पाएंगी.

बता दें, ग्लोबल फायरपावर (GFP) इंडेक्स से और मेजर जनरल राजन कोचर से बातचीत के आधार पर ये जानकारी ली गई है.

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