अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को कड़ी चेतावनी दी है। मामला पनामा नहर पर कब्जा करने का है। चीन कई महीनों से पनामा नहर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इससे राष्ट्रपति ट्रंप भड़के हुए हैं। नॉर्थ डकोटा में रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए उन्होंने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को चेतावनी दी कि वे उन्हें पनामा नहर पर कब्जा नहीं करने देंगे। पनामा पर कब्जा करने की चीन की हर कोशिश को नाकाम करेंगे। पनामा नहर का कब्जा चीन को देने के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि पनामा नहर का कंट्रोल चीन को नहीं दिया जाना चाहिए था।

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4 गुना बढ़ाई जहाजों से वसूली जाने वाली फीस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पनामा ने नहर का कंट्रोल लेने के बाद फीस बढ़ा दी, जिससे खूब कमाई हो रही है। जब से नहर पनामा को सौंपी गई तो सबसे पहले जहाजों से वसूली जाने वाली फीस 4 गुना बढ़ाई गई। लेकिन नहर से जहाजों की आवाजाही कम नहीं हुई। फीस फिर बढ़ाई गई, लेकिन जहाज कम नहीं हुए। इस तरह फीस बढ़ाकर पनामा ने कितना पैसा कमा लिया, अंदाजा लगा सकते हैं। अब पनामा तो पैसा कमा रहा है, लेकिन कई देशों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। अमेरिका पनामा का इस तरह फायदा नहीं उठाने देगा और चीन को इसे कब्जाने नहीं देगा।

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दूसरे कार्यकाल के पहले भाषण में दी थी चेतावनी

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को पनामा नहर को लेकर अपने इरादे दूसरे कार्यकाल के पहले भाषण में ही स्पष्ट कर दिए थे। जनवरी 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वे पनामा नहर का कंट्रोल वापस अपने हाथ में लेना चाहते हैं, क्योंकि चीन इस रास्ते से आने-जाने वाले जहाजों से मनमानी फीस वसूल रहा है। अमेरिका ने वेनेजुएला के मामले में अच्छा काम किया और ईरान के मामले में भी अच्छा काम किया है। अब अमेरिका चीन के मामले में भी अच्छा काम करेगा। चीन को पनामा नहर पर कब्जा करने नहीं देगा। इसके लिए चीन को भी कोशिश करेगा, उसे नाकाम कर दिया जाएगा।

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क्या है पनामा नहर और दुनिया में इसका महत्व?

बता दें कि पनामा नहर 82 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जिसे बनाया गया है। यह जलमार्ग पनामा के स्थलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से से गुजरता है। यह जलमार्ग अटलांटिक महासागर और प्रशांत महासागर के बीच समुद्री व्यापार का मुख्य मार्ग है। इस नहर का निर्माण कार्य 1903 में शुरू हुआ था और 1914 में यह बनकर तैयार हो गई थी, तब से इस रास्ते से व्यापार हो रहा है। इस नहर पर लंबे समय तक अमेरिका का कंट्रोल रहा, लेकिन बाद में इसका कंट्रोल पनामा को सौंप दिया गया था। लेकिन अब इस जलमार्ग को लेकर अमेरिका और पनामा के रिश्तों में चीन के कारण तनाव आ गया है।

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