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ईरान को परमाणु हथियार बनाने से क्यों रोकता है अमेरिका-इजरायल? क्या है 11 साल पुराना विवाद, जो बना जंग की वजह

ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए अमेरिका और इजरायल ने महायुद्ध छेड़ दिया है. 2015 की परमाणु डील टूटने के बाद संवर्धन की होड़ ही आज विनाशकारी जंग की मुख्य वजह बनी है.

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अमेरिका और ईरान के बीच आज जो भीषण युद्ध जैसे हालात बने हैं, उसकी असली वजह 11 साल पुराने परमाणु विवाद में छिपी है. साल 2015 में दुनिया की महाशक्तियों और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था, जिसे जेसीपीओए (JCPOA) कहा जाता है. इस डील का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था. इसके बदले में ईरान को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और तेल व्यापार में वापसी का मौका दिया गया और उस पर लगे अरबों डॉलर के कड़े प्रतिबंधों में राहत दी गई थी. इस समझौते के तहत ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) के स्तर को सीमित करने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को जांच की अनुमति देने पर सहमति जताई थी.

ट्रंप का फैसला और समझौते का बिखरना

साल 2018 में डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते को पूरी दुनिया के लिए खतरनाक बताते हुए इससे हाथ खींच लिए थे. अमेरिका के अलग होने के बाद ईरान पर पहले से भी ज्यादा सख्त आर्थिक पाबंदियां लगा दी गईं. इसका नतीजा यह हुआ कि ईरान ने भी समझौते की शर्तों को धीरे-धीरे नजरअंदाज करना शुरू कर दिया. ईरान ने न केवल यूरेनियम संवर्धन की सीमा को बढ़ाया बल्कि सेंट्रीफ्यूज की संख्या में भी भारी इजाफा किया. इजरायल का मानना है कि परमाणु संपन्न ईरान उसके अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है, इसलिए वह किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना चाहता है.

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ओमान वार्ता और 2026 का अल्टीमेटम

साल 2026 की शुरुआत में यह विवाद अपने चरम पर पहुंच गया. फरवरी 2026 में ट्रंप प्रशासन ने ओमान में एक नई वार्ता की पुष्टि की, जिसका मकसद ईरान को एक नए और ज्यादा सख्त ‘सार्थक समझौते’ के लिए मजबूर करना था. अमेरिका ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर ईरान उनकी नई शर्तों को नहीं मानता है, तो उसे गंभीर सैन्य परिणाम भुगतने होंगे. दूसरी ओर फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन (E3) भी ईरान के रुख से नाराज थे. इन देशों ने साफ कर दिया था कि अगर ईरान पीछे नहीं हटा, तो वे 2025 तक संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रतिबंधों को ‘स्नैपबैक’ प्रक्रिया के तहत दोबारा लागू कर देंगे.

जंग की जमीन और परमाणु ठिकानों पर हमला

बातचीत के रास्ते बंद होने और धमकियों के दौर ने आखिरकार युद्ध की शक्ल ले ली. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया ताकि उसकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म किया जा सके. ईरान ने भी अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए पलटवार किया और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं. 11 साल पहले जो विवाद मेज पर सुलझाने की कोशिश की गई थी, वह अब बारूद और धमाकों के बीच एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह परमाणु विवाद किसी बड़े परमाणु युद्ध की शुरुआत तो नहीं है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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