चीन में इन दिनों एक खिलौना पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. 'नताशा डॉल' नाम से मशहूर ये छोटी बेबी डॉल सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. हालांकि ये लोकप्रियता किसी अच्छी वजह से नहीं, बल्कि नस्लवाद और हिंसा से जुड़े गंभीर आरोपों के कारण मिली है. दरअसल, ये डॉल गहरे रंग की एक बच्चे जैसी दिखाई देती है. कई वीडियो में लोग इस डॉल को दबाते, खींचते, पटकते, मारते और यहां तक कि उसे नुकसान पहुंचाते हुए नजर आते हैं. इन वीडियो को कुछ लोग मनोरंजन और तनाव दूर करने का तरीका बता रहे हैं, लेकिन दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग इसे नस्लीय भेदभाव और अमानवीय सोच का प्रतीक मान रहे हैं.

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क्या है पूरा विवाद?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि लोग इस डॉल के साथ बेहद हिंसक व्यवहार करते हैं. आलोचकों का कहना है कि चूंकि ये डॉल एक अश्वेत (ब्लैक) बच्चे जैसी दिखाई देती है, इसलिए उसके साथ इस तरह का व्यवहार नस्लवादी मानसिकता को बढ़ावा देता है. कई लोगों ने इसे ब्लैक समुदाय का अपमान बताया है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस ट्रेंड की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि किसी भी नस्ल या समुदाय से मिलते-जुलते शेप वाले खिलौने के साथ हिंसा को मनोरंजन बनाना गलत संदेश देता है. इससे बच्चों और समाज पर भी नेगेटिव असर पड़ सकता है.

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

‘नताशा डॉल’ से जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कई यूजर्स ने इस ट्रेंड को तुरंत बंद करने की मांग की है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि ये सिर्फ एक खिलौना है और इसे नस्लवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि ज्यादातर प्रतिक्रियाओं में इस ट्रेंड की आलोचना ही देखने को मिली है. कई लोगों का मानना है कि किसी भी समुदाय की पहचान से जुड़ी आकृति को हिंसा का प्रतीक बनाना समाज के लिए गलत संदेश देता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यूज और वायरल होने की होड़ में लोग कई बार ऐसे कंटेंट बना देते हैं जो संवेदनशील मुद्दों को जन्म दे देते हैं. ‘नताशा डॉल’ का मामला भी इसी तरह का माना जा रहा है. इस विवाद ने नस्लवाद, डिजिटल कंटेंट की जिम्मेदारी और सोशल मीडिया ट्रेंड्स पर एक नई बहस छेड़ दी है.

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