युगांडा के टूरो किंगडम को जल्द ही एक ऐसा राजा मिलने जा रहा है, जिसकी पहचान लंबे समय तक शाही परिवार से ज्यादा एक टीवी न्यूज एंकर के तौर पर रही है. प्रिंस एडवर्ड रुकिडी किजानंगोमा न्याबोंगो प्रथम को युगांडा का नया राजा चुना गया है. नया राजा चुने जाने से पहले 56 वर्षीय न्याबोंगो स्थानीय सरकारी मीडिया संस्थान में टीवी एंकर, एडिटर और ब्रॉडकास्टर के रूप में काम कर चुके हैं. राजगद्दी संभालने के बाद उन्होंने अपने लिए ‘एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो’ नाम चुना है.
एक पत्रकार से युगांडा के राजा तक का सफर
न्याबोंगो के पूर्व सहकर्मियों के मुताबिक वह सरल स्वभाव और जमीन से जुड़े व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. पत्रकारिता के दौरान उनका काम खबरों को लोगों तक पहुंचाना था, लेकिन अब उनका खुद का राजा बनना न्याबोंगो को न्यूज की सुर्खियों में ला दिया है. टेलीविजन से जुड़े रहने के चलते न्याबोंगो लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहे हैं. हालांकि, पारंपरिक शाही जिम्मेदारियों के बजाय उनका करियर मीडिया क्षेत्र में रहा है. यही वजह है कि उनका राजा बनना टूरो के इतिहास में एक अजीबोगरीब मामला माना जा रहा है.
यह भी पढ़ें: हर डिलीवरी बॉक्स का रंग भूरा ही क्यों होता है? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
राजा ओयो की मौत के बाद उठा विवाद
न्याबोंगो का चुनाव टूरो किंगडम के पूर्व राजा ओयो न्यिंबा कबाम्बा इगुरु रुकिडी चतुर्थ की मौत के बाद हुआ. 34 वर्ष की उम्र में कैंसर से जूझ रहे पूर्व राजा ओयो न्यिंबा का निधन हो गया. तीन साल की उम्र में ही पिता के निधन के बाद 1995 में उन्हें युगांडा का राजा बनाया गया था. राजा ओयो के निधन के बाद उत्तराधिकारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. उनकी मां क्वीन मदर बेस्ट केमिगिसा और बहन प्रिंसेस रूथ कोमुनटाले ने न्याबोंगो को राजा बनाने पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि ओयो का एक छोटा बेटा है और उसे उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए.
हालांकि, टूरो के शासक बाबीटो कबीले ने कहा कि उसे कथित उत्तराधिकारी के बारे में जानकारी नहीं थी. इसके बाद पारंपरिक उत्तराधिकार प्रक्रिया के तहत योग्य राजकुमारों में से न्याबोंगो का चयन किया गया.
क्या है टूरो किंगडम (Tooro kingdom)?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टूरो युगांडा के पारंपरिक साम्राज्यों में से एक है. ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद देश में राजशाही व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी. हालांकि, 1993 में पारंपरिक राजघरानों को फिर से मान्यता दी गई. आज इन राजाओं के पास औपचारिक राजनीतिक शक्ति नहीं है, लेकिन अपने समुदायों में उनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव बना हुआ है. वे परंपराओं, संस्कृति और सामुदायिक पहचान के संरक्षक के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
यह भी पढ़ें: डेंगू-मलेरिया का खौफ जीरो, क्या दुनिया में कोई ऐसा देश है जहां मच्छर न हो?
संबंधित खबरें
Explainer: दूसरे देश की फ्लाइट उड़ाने के क्या हैं नियम, कोई पाकिस्तानी पायलट भारत में उड़ा सकता है विमान?
3 hrs agoकॉकपिट के अंदर क्या हुआ था? फ्लाईदुबई फ्लाइट का नया VIDEO आया सामने; घुटनों पर बैठा दिखा हमलावर
5 hrs ago'PM मोदी के विचारों से रुक सकती है यूक्रेन जंग', पुतिन ने शांति प्रयासों की खुलकर की तारीफ
7 hrs agoAaj Ki Taaza Khabar LIVE Updates: हिरासत में लिए गए AAP नेताओं समेत 150 लोग, जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी
7 hrs ago'कनेक्शन मिला तो बुरा होगा अंजाम', डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को धमकी, जानें फ्लाईदुबई फ्लाइट हादसे पर क्या बोले?
8 hrs agoईरान पर फिर भीषण हमले की तैयारी, डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में तैनात किए 9000 सैनिक और 3 एयरक्राफ्ट कैरियर
9 hrs ago'मुझे मार डालो', पकड़े जाने के बाद घुटनों के बल बैठकर क्यों चीखा ओमानी पायलट?
16 hrs agoफ्रांस में उग्र हुआ छात्रों का आंदोलन, Gen-Z का गुस्सा देख PM लेकोर्नू ने मंत्रियों संग की आपात बैठक
16 hrs ago9 महीने पहले भर्ती… इस्लामी कट्टरपंथ वाली विचारधारा, फ्लाईदुबई के ओमानी पायलट को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
20 hrs agoसर और पैर पर गहरे जख्म के बावजूद पायलट स्मित मच्छार ने बचाई 174 लोगों की जान, फ्लाईदुबई के यात्री ने बताया आंखों देखा हाल
22 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines