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कौन हैं युगांडा के नए राजा एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो? न्यूज एंकर के तौर पर किया काम, अब संभालेंगे राजगद्दी

टूरो युगांडा के पारंपरिक साम्राज्यों में से एक है. ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद देश में राजशाही व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी. हालांकि, 1993 में पारंपरिक राजघरानों को फिर से मान्यता दी गई.

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प्रिंस एडवर्ड रुकिडी किजानंगोमा न्याबोंगो प्रथम (Photo: YouTube/SSENGA BIROOTO N'EDDAGALA OFFICIAL SSENGA BIROOTO N'EDDAGALA OFFICIAL)

युगांडा के टूरो किंगडम को जल्द ही एक ऐसा राजा मिलने जा रहा है, जिसकी पहचान लंबे समय तक शाही परिवार से ज्यादा एक टीवी न्यूज एंकर के तौर पर रही है. प्रिंस एडवर्ड रुकिडी किजानंगोमा न्याबोंगो प्रथम को युगांडा का नया राजा चुना गया है. नया राजा चुने जाने से पहले 56 वर्षीय न्याबोंगो स्थानीय सरकारी मीडिया संस्थान में टीवी एंकर, एडिटर और ब्रॉडकास्टर के रूप में काम कर चुके हैं. राजगद्दी संभालने के बाद उन्होंने अपने लिए ‘एडवर्ड रुकिडी न्याबोंगो’ नाम चुना है.

एक पत्रकार से युगांडा के राजा तक का सफर

न्याबोंगो के पूर्व सहकर्मियों के मुताबिक वह सरल स्वभाव और जमीन से जुड़े व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं. पत्रकारिता के दौरान उनका काम खबरों को लोगों तक पहुंचाना था, लेकिन अब उनका खुद का राजा बनना न्याबोंगो को न्यूज की सुर्खियों में ला दिया है. टेलीविजन से जुड़े रहने के चलते न्याबोंगो लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहे हैं. हालांकि, पारंपरिक शाही जिम्मेदारियों के बजाय उनका करियर मीडिया क्षेत्र में रहा है. यही वजह है कि उनका राजा बनना टूरो के इतिहास में एक अजीबोगरीब मामला माना जा रहा है.

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राजा ओयो की मौत के बाद उठा विवाद

न्याबोंगो का चुनाव टूरो किंगडम के पूर्व राजा ओयो न्यिंबा कबाम्बा इगुरु रुकिडी चतुर्थ की मौत के बाद हुआ. 34 वर्ष की उम्र में कैंसर से जूझ रहे पूर्व राजा ओयो न्यिंबा का निधन हो गया. तीन साल की उम्र में ही पिता के निधन के बाद 1995 में उन्हें युगांडा का राजा बनाया गया था. राजा ओयो के निधन के बाद उत्तराधिकारी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. उनकी मां क्वीन मदर बेस्ट केमिगिसा और बहन प्रिंसेस रूथ कोमुनटाले ने न्याबोंगो को राजा बनाने पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि ओयो का एक छोटा बेटा है और उसे उत्तराधिकारी बनाया जाना चाहिए.

हालांकि, टूरो के शासक बाबीटो कबीले ने कहा कि उसे कथित उत्तराधिकारी के बारे में जानकारी नहीं थी. इसके बाद पारंपरिक उत्तराधिकार प्रक्रिया के तहत योग्य राजकुमारों में से न्याबोंगो का चयन किया गया.

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क्या है टूरो किंगडम (Tooro kingdom)?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि टूरो युगांडा के पारंपरिक साम्राज्यों में से एक है. ब्रिटिश शासन से आजादी के बाद देश में राजशाही व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी. हालांकि, 1993 में पारंपरिक राजघरानों को फिर से मान्यता दी गई. आज इन राजाओं के पास औपचारिक राजनीतिक शक्ति नहीं है, लेकिन अपने समुदायों में उनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव बना हुआ है. वे परंपराओं, संस्कृति और सामुदायिक पहचान के संरक्षक के तौर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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